पानीपत। पानीपत के शाहपुर गांव निवासी डॉ. रोहित के पिता डीटीसी में परिचालक हैं। वे बेटे को पढ़ा-लिखाकर बड़ा बनाना चाहते थे और अपनी नौकरी के साथ परिवार को नोएडा शिफ्ट कर लिया। पिता ने कड़ी मेहनत कर रोहित कुंडू को एमबीबीएस कराया। जनवरी 2017 में रोहित का रेलवे में बतौर डिवीजनल मेडिकल ऑफिसर चयन हो गया। वह पिछले कई साल से नॉदर्न रेलवे हेल्थ यूनिट पानीपत के इंचार्ज के रूप में कार्यरत है। उस पर रेलवे अधिकारियों व कर्मचारियों के स्वास्थ्य की भी जिम्मेदारी है। निजी अस्पतालों में मरीज रेफर करने के खेल और लालच ने पिता के सपने तोड़ दिए।
डॉ. रोहित को रेलवे के अस्पताल से निजी अस्पताल में मरीज रेफर कर व उनके बिल पास करने पर मोटे पैसे कमाने का लालच आ गया। उसने जीएम से साढ़े 12 लाख रुपये के बिल पास करने के एवज में पांच लाख रुपये व भविष्य में वहां मरीज रेफर करने के लिए 10 लाख रुपये मांग लिए। इससे पहले भी वह ऐसे ही एक लाख रुपये कमा चुका है। उसको मोटे पैसे कमाने का तरीका भा गया था। इसी लालच ने उसे सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।
एंटी करप्शन ब्यूरो की पूछताछ में सामने आया है कि डॉक्टर एक बार में निजी अस्पताल से 15 लाख रुपये में ठेका करना चाहता था। ठेके के अनुसार उसे भविष्य में रेलवे अस्पताल में आने वाले मरीजों को जीटी रोड स्थित निजी अस्पताल में रेफर करना था। फिर उन मरीजों के बिल भी पास करने थे। इसी एवज में डॉक्टर को पांच लाख लेते पकड़ा गया है।
डॉ. रोहित कुुंडू पर आरोप है कि वह मई के पहले सप्ताह में ही फरवरी, मार्च व अप्रैल माह के 16 लाख के इलाज के बिल पास करने के लिए रुपये मांगने लगा था। हर माह के बिल अगले माह के प्रथम सप्ताह में पास होते हैं। जीएम नवीन डॉ. रोहित की फोन पर होने वाली बातचीत की रिकॉर्डिंग करने लगा। नवीन ने सोमवार को एंटी ब्यूरो करप्शन के प्रभारी सुमित सरोहा को रिकॉर्डिंग सौंपी। इसके बाद टीम ने उसे रंगेहाथ गिरफ्तार किया।