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Panipat News: शामलात देह जमीन की मलकियत के लिए किसान आए आगे, पांच मिनट के लिए टोल कराया फ्री

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सनौली (पानीपत)। यमुना खादर के करीब 60 गांवों के किसानों ने अपनी शामलात देह की जमीन को मलकियत करने की मांग को लेकर रविवार को हरिद्वार हाईवे स्थित सनौली-तामशाबाद टोल के पास बने हेलिपेड वाले स्थान पर किसान महा पंचायत की गई। किसानों ने सांकेतिक रूप से करीब पांच मिनट तक टोल को फ्री कराया। किसानों ने मांगों के न मानने पर अनिश्चितकालीन टोल फ्री कराने के साथ धरना देने की चेतावनी दी। इस दौरान सनौली खुर्द थाना पुलिस भी मौजूद रही।
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महापंचायत की अध्यक्षता बुजुर्ग किसान रघबीर सिंह बिलासपुर ने की और मंच संचालन यमुना सुधार समिति के प्रदेशाध्यक्ष एवं प्रमुख किसान एडवोकेट रतन सिंह रावल ने किया। किसान महापंचायत के उपरांत कुछ देर के लिए तामशाबाद टोल को फ्री करवाया गया और सरकार को अल्टीमेटम दिया गया कि किसान अपने हक को लेकर अब आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। सरकार ने जल्द ही यमुना से सटे गांवों की शामलात देह की भूमि को मलकियत में नहीं किया तो किसान अब होने वाले लोकसभा व विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला भी ले सकते हैं।
सनौली के पूर्व सरपंच ऋषिपाल त्यागी को किसान संघर्ष समिति का अध्यक्ष बनाया गया और रतन सिंह रावल को संरक्षक नियुक्त किया गया। यमुना खादर के सभी गांवों से 11-11 किसानों की कमेटी बनाई गई है। अब आगे का शामलात देह की भूमि को लेकर आंदोलन चलाया जाएगा। रतन सिंह रावल ने कहा कि यमुना से लगते गांव के किसान शामलात देह की भूमि में हिस्सेदार हैं और खादर की जमीन इन गांवों के किसानों की मलकियत वाली जमीन है। वे करीब 100 सालों से खेती करते आ रहे हैं, लेकिन यमुना का बहाव इधर-उधर होने से यह जमीन खुर्द बुर्द होती रही।
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पंजाब विलेज कॉमन लैंड एक्ट 1961 के सेक्शन 2 जी (1) के अपवाद में इस खादर वाली जमीन को छूट दी थी। जिसमें कहा गया था कि यह जमीन कभी भी पंचायत में नहीं जाएगी। सरकार ने बिना खादर के लोगों की राय लिए ही नोटिफिकेशन कर इस अपवाद को हटा दिया गया और इससे खादर के लोगों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। यदि इस नोटिफिकेशन को वापस नहीं लिया तो यह जमीन पंचायत में चली जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे हथनी कुंड बैराज से लेकर पलवल तक के लाखों किसानों की जमीन प्रभावित होगी।
अधिवक्ता रतन सिंह रावल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश उनकी उक्त जमीन पर लागू नहीं होते। चूंकि उनके गांवों की उक्त जमीन किसी भी समय ग्राम पंचायत की नहीं रही है। बल्कि यह यमुना में बुर्द होने की वजह से शामलात बनी है। जमीन बुर्द होने की वजह से अपनी जमीन काश्त करने से वंचित रहना पड़ा।
इस अवसर पर महापंचायत में सनौली खुर्द सरपंच संजय त्यागी, राजदीप सरपंच, राणा माजरा सरपंच खुर्शीद, मोसिन सरपंच, पूर्व सरपंच विजयपाल रावल, पूर्व सरपंच सोएब आलम, सोएब आलम, पूर्व सरपंच अख्तर, बलिंद्र, पप्पू रावल संजौली, सुभाष रावल, रामेहर त्यागी, नवाब अली नवादा आर, राजपाल रावल, बलिंद्र राणा बापौली, प्रीतम प्रधान, रोहित नन्हेड़ा, राजबीर रावल, पूर्व सरपंच प्रेम वाल्मीकि, ओमप्रकाश शर्मा व पूर्व सरपंच विजयपाल मौजूद रहे।

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1842 से 1974 तक हमारी मलकियत जमीन बुर्द को छीनने की साजिश
अधिवक्ता रतन सिंह रावल ने बताया कि यमुना नदी से सटे गांवों के ग्रामीणों से जमीन छीनने की नीयत से इसका इंद्राज ग्राम पंचायत के नाम करना चाहते हैं, जो कि न्याय के विरुद्ध है। यदि शुरू से आज तक इस भूमि के राजस्व रिकॉर्ड का अवलोकन किया जाता है तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि यह जमीन किसी भी सूरत में ग्राम पंचायत के नाम नहीं की जा सकती। यह उनकी मलकियत को जमीन है। बंदोबस्त 1842 से 1974 तक मलकियत जमीन बुर्द हुई है।
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