पानीपत। निजी अस्पतालों में हर दूसरी डिलीवरी सर्जरी से हो रही है। 2023 में 51 प्रतिशत बच्चों ने सर्जरी से जन्म लिया है। जबकि सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में महज 13 प्रतिशत सिजेरियन डिलीवरी हुई है। 2023 में अप्रैल से दिसंबर तक जिले में कुल 20187 डिलीवरी हुई। इनमें 12527 सरकारी व 7661 डिलीवरी निजी अस्पतालों में हुई। निजी अस्पतालों के डॉक्टरों पर आरोप है कि वो कमाई के लालच में सामान्य की बजाय सिजेरियन डिलीवरी को प्राथमिकताएं देते हैं। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में निशुल्क डिलीवरी होती है। इसलिए यहां डॉक्टर सामान्य डिलीवरी का प्रयास करते हैं। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में 13 प्रतिशत यानि महज 1625 डिलीवरी सर्जरी से हुई है। जबकि निजी अस्पतालों में 3915 डिलीवरी सर्जरी से हुई है।
स्वास्थ्य विभाग प्रयास के बाद भी घर पर प्रसव पर अंकुश नहीं लगा पा रहा है। पिछले सात साल में जिले में 7320 महिलाओं ने घर पर बच्चों को जन्म दिया है। 2023 में भी 483 महिलाओं का घर पर प्रसव करवाया गया है। हालांकि ये आंकड़ा 2022 के मुकाबले कम है। 2022 में ये आंकड़ा 511 था। जिले में अब भी लोग दाइयों पर विश्वास कर रहे हैं। घर पर प्रसव करवाने के बाद कितने बच्चे स्वस्थ हैं इसके आंकड़े स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है। 2023 में जिले में जनवरी से दिसंबर तक कुल 30178 डिलीवरी हुई हैं। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में 16321 व प्राइवेट अस्पतालों में 13857 डिलीवरी हुई हैं। 2017 में जिले में संस्थागत डिलीवरी का प्रतिशत 93.93 था। अब छह साल बाद ये बढ़कर 98.42 हो चुका है। पिछले चार साल में नागरिक अस्पताल में डिलीवरी के दौरान 111 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है।
होम डिलीवरी का आंकड़ा-
साल घर पर प्रसव
2017 1769
2018 1383
2019 1329
2020 911
2021 934
2022 511
2023 483
कुल 7320
वर्जन :
निजी अस्पतालों में 51 प्रतिशत सिजेरियन डिलीवरी हुई है। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में ये प्रतिशत महज 13 प्रतिशत है। ये जांच का विषय है। इसकी गंभीरता से जांच की जाएगी। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधाएं बढ़ाई जा रही है।
डॉ. जयंत आहूजा, जिला सिविल सर्जन