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उद्यमियों ने खुद ढूंढकर दी कॉमन बॉयलर के लिए जगह, अब तक काम शुरू नहीं

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पानीपत। औद्योगिक नगरी की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। अब औद्योगिक नगरी के पांच सौ डाइंग यूनिट, पोलर कंबल यूनिट व मिंक कंबल यूनिट के पास महज 12 दिन का समय बचा है। 30 सितंबर के बाद कोयले से चलने वाले इन उद्योगों पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ताला जड़ देगा। उद्यमी ताले से बचने के लिए सरकार से जल्द कॉमन बॉयलर की मांग कर रहे हैं, ताकि एक ही बॉयलर से सभी उद्योगों को स्टीम मिल सके। लेकिन दो साल बाद भी एचएसआईआईडीसी कॉमन बॉयलर पर काम शुरू नहीं कर पाया है। उद्यमियों ने छह माह पहले सेक्टर 29 पार्ट टू में कॉमन बॉयलर के लिए 10 हजार वर्ग मीटर भूमि ढूंढकर दी थी। इसको प्रशासन ने फाइनल भी कर लिया। लेकिन इससे आगे काम नहीं बढ़ा। अधिकारी उद्यमियों को जल्द कॉमन बॉयलर पर काम करने का आश्वासन दे रहे हैं। कॉमन बॉयलर के लिए गुजरात की एक कंपनी पूरा सर्वे कर चुकी है। सरकार की ओर सभी प्रोजेक्ट पर हरी झंडी मिल चुकी है। वहीं दूसरी ओर अब तक शहर में महज 40 उद्योगों के पास ही पीएनजी की सप्लाई है। एक अक्तूबर से पानीपत में ग्रैप यानी ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान लागू होगा। इसके तहत शहर में सिर्फ पीएनजी आधारित उद्योग ही चलेंगे। जहां पीएनजी की पाइनलाइन नहीं है, वहां उद्योगों को पीएनजी पर आने के लिए एक दिसंबर तक का वक्त दिया गया है।
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दो माह पहले सरकार ने पानीपत शहर और मतलौडा को एनसीआर से बाहर करने के लिए प्लानिंग कमेटी के पास प्रस्ताव भेजा था। अभी तक पानीपत और मतलौडा को एनसीआर से बाहर नहीं किया गया। उद्योगपति भी इस असमंजस में फंसे हुए हैं की वह एनसीआर से बाहर होंगे या नहीं।
पानीपत इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रेसिडेंट प्रीतम सचदेवा ने बताया कि आज भी पानीपत के उद्योगपति इसी आस पर है कि वह एनसीआर से बाहर हो जाएंगे, लेकिन सरकार के साथ उनकी कोई अभी तक मीटिंग इस बात को लेकर नहीं हुई। ऐसे में एनसीआर के रूल ही लागू होंगे। पानीपत का 50 प्रतिशत उद्योग ठप हो जाएगा। पानीपत इंडस्ट्रीज एसोसिएशन प्रेसिडेंट प्रीतम सचदेवा।
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डायर्स एसोसिएशन के प्रधान भीम राणा ने बताया कि कुछ इंडस्ट्रीज कोयले के साथ-साथ बायोफ्यूल यानी लकड़ी के बुरादे और लकड़ी के गुटकों के साथ संचालित की जाने लगी हैं, लेकिन बायोफ्यूल कोयले के मुकाबले और अधिक महंगा पड़ता है। पीएनजी कोयला और बायोफ्यूल दोनों से ही महंगी मिल रही है। साथ ही इस बात की भी गारंटी नहीं है कि आने वाले समय में वह पीएनजी कनेक्शन लेते भी हैं तो पीएनजी के रेटों में इजाफा नहीं होगा। सरकार से मांग है कि जल्द कॉमन बॉयलर लगाए।
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