पानीपत। शारदीय नवरात्र की अष्टमी तिथि धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन कई जातक कन्या पूजन व हवन भी करते हैं। अष्टमी तिथि के दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां की आराधना करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इस बार 11 अक्टूबर शुक्रवार को दुर्गा अष्टमी मनाई जाएगी। 12 अक्टूबर शनिवार को नवमी व दशहरा एक ही दिन होंगे।
गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के संचालक डॉ. रामराज कौशिक ने बताया कि इस बार नवरात्र में तृतीय तिथि बढ़ी है। तीसरा नवरात्र दो दिन तक रहा। जिससे तिथियाें में घटत बढ़त की स्थिति बनी। नवरात्रि की अष्टमी तिथि विशेष रूप से फलदायी मानी जाती हैं। अष्टमी के दिन ही माता दुर्गा ने चंड-मुंड नामक दैत्यों का वध किया था। दुर्गा पूजन का विशेष महत्व है। वहीं अगर नौ दिनों का व्रत नहीं रखा है तो अष्टमी पर व्रत रख सकते हैं। अष्टमी के दिन व्रत रखने और माता की आराधना करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। कई लोग व्रत कर अष्टमी के दिन माता की प्रसन्नता के लिए कन्या पूजन करते हैं।
डॉ. रामराज ने बताया कि इस साल शारदीय नवरात्रि की अष्टमी तिथि को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो रही थी। पंचांग के अनुसार 10 अक्तूबर को दोपहर में 12:31 बजे से अष्टमी तिथि लगी है। जो 11 अक्टूबर को दोपहर 12:06 बजे तक रहेगी। ऐसे में उदया तिथि की मानें तो 11 अक्टूबर के दिन अष्टमी तिथि रहेगी। इसलिए महाअष्टमी 11 अक्तूबर शुक्रवार को होगी।