पानीपत। उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम (सीजीआरएफ) का आधा घंटे देरी से शुरू दरबार सोमवार को पांच घंंटे चला। दरबार में पांच ही शिकायत पहुंची, लेकिन अधिकारी एक भी शिकायत का समाधान नहीं कर पाए। तीन शिकायतों को अपील केस में लगा दिया, जबकि दो संबंधित एसडीओ को आगामी कार्रवाई के लिए दिया। अधिकारियों के समय पर न पहुंचने से उपभोक्ताओं को बाहर गेट पर खड़े होकर इंतजार करना पड़ा।
सेक्टर-छह स्थित 33 केवी सब स्टेशन के सभागार में सोमवार को सीजीआरएफ का दरबार लगाया गया। उपभोक्ता सुबह नौ बजे ही पहुंच गए थे। दरबार का समय 11 बजे था। अधिकारी आधा घंटा देरी से करीब 11:30 बजे दरबार में पहुंचे। यहां चार बजे तक महज पांच उपभोक्ताओं ने अपनी शिकायतें रखी। सीजीआरएफ चेयरमैन आरके खन्ना ने तीन शिकायतों का अपील केस बना दिया, वहीं दो काे संबंधित सब डिवीजन के एसडीओ को समाधान के लिए लिखा। इनमें एमसीओ, बिल व प्लाॅट में खंभा लगाने से संबंधित शिकायतें शामिल रहीं। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को उपभोक्ताओं की समस्याओं का समय पर निवारण करने के लिए कहा। इस मौके पर एसई नरेंद्र कुमार, एसडीओ यतेंद्र कटारा, एसडीओ अंजलि शर्मा, कार्यकारी अभियंता समालखा एचएस धीमान, चीफ अकाउंट ऑफिसर हीरा लाल व रवि कुमार मौजूद रहे।
नलकूप कनेक्शन को लेकर लगा रहा चक्कर
धर्मगढ़ निवासी अरविंद ने बताया कि वर्ष 2018 में नलकूप कनेक्शन को लेकर आवेदन किया था। 30 हजार रुपये डिमांड नोटिस व 93 हजार रुपये एस्टीमेट बजट जमा कराने के बाद भी कनेक्शन नहीं मिला। स्थानीय अधिकारी ठेकेदार से जल्द काम कराने का आश्वासन देते रहे, यहां दरबार में भी चेयरमैन ने जल्द कनेक्शन चालू कराने का आश्वासन दिया।
साल भर से नहीं रखा गया ट्रांसफार्मर
दरियापुर की पूनम ने बताया कि अधिकारियों के इंतजार में पति के साथ आधे घंटे से बाहर सड़क पर खड़े रहना पड़ा। अधिकारियों के आने पर शिकायत देकर बताया कि खेत में पानी सिंचाई को लेकर नलकूप लगा रखा है। लो वोल्टेज से बिजली सप्लाई होने के कारण आए दिन मोटर खराब हो जाता है। सालभर पहले अधिकारियों ने 25 केवीए ट्रांसफार्मर लगाने के लिए एस्टीमेट उच्चाधिकारियों को भेजा, जिसे मंजूरी भी मिल गई। लेकिन आज तक भी ट्रांसफार्मर नहीं लगा।
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निगम ने भेजा गलत बिल, दो साल से काट रहा चक्कर
मॉडल टाउन निवासी सुमित कुमार ने बताया कि उन्होंने कोरोना काल से पहले फैक्टरी कनेक्शन का लोड 19 केवीए से 49 केवीए कराया था। लॉकडाउन में 74800 रुपये का बिल आया तो भर दिया। अप्रैल माह में ही फिर से बिल बकाया होने का नोटिस दे दिया। निगम की इस गलती को ठीक कराने के लिए पिछले दो साल से कार्यालयों के चक्कर काट रहा हूं। जब स्थानीय अधिकारियों ने सुनवाई नहीं की तो सीजीआरएफ दरबार पहुंचा।