पानीपत। सरकारी चिकित्सक शुक्रवार को सामूहिक अवकाश पर चले गए। कई डिप्टी सीएमओ और दूसरे अधिकारियों ने भी इनको अपना समर्थन किया। जिसके चलते स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हो गई। जिला नागरिक अस्पताल में ओपीडी की पर्ची बनती रही, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं मिले। आपातकालीन विभाग में घायलों व गंभीर मरीजों को भी इलाज नहीं मिल पाया।
मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थी लाख प्रयास के बाद भी आपातकालीन सेवाओं को नहीं संभाल पाए। चिकित्सक पोस्टमार्टम के लिए भी आगे नहीं आए। ऐसे में परिजन शवों को पूरा दिन पोस्टमार्टम हाउस में रखकर चिकित्सकों का इंतजार करते रहे। वहीं ओपीडी और आपातकाल में भी मरीज चिकित्सकों के इंतजार में भटकते रहे। सीएम ने ओपीडी में खुद कमान संभाली और मरीजों की जांच की। इन सबके बीच अस्पताल में ओपीडी में करीब 630 लोग इलाज कराने पहुंचे।
हरियाणा मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के आह्वान पर जिला नागरिक अस्पताल के चिकित्सक शुक्रवार को अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश पर चले गए। जिला प्रधान डॉ. रिंकू सांगवान व उप प्रधान डॉ. वीरेंद्र ढांडा ने बताया कि चिकित्सक शुक्रवार सुबह से सामूहिक अवकाश पर रहे। उन्होंने कहा कि सरकार के सामने कई बार अपनी मांग रख चुके हैं, लेकिन किसी प्रकार का समाधान नहीं हुआ है। विशेषज्ञ चिकित्सकों का अलग से कैडर नहीं बनाया जा रहा, जबकि मुख्यमंत्री इसकी घोषणा कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि सीनियर मेडिकल ऑफिसर की सीधी भर्ती करने की बजाय पदोन्नति की जाए।
सीधी भर्ती करने से वरिष्ठ चिकित्सकों को अपने कनिष्ठ के नीचे काम करना होगा। जिला नागरिक अस्पताल के 70 में से अधिकतर चिकित्सक सामूहिक अवकाश पर रहे। अस्पताल की ओपीडी में सुबह ही मरीज चिकित्सकों के लिए इधर-उधर पहुंचे।
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सीएमओ ने खुद संभाली ओपीडी
सीएमओ डॉ. जयंत आहूजा ने चिकित्सकों के काम पर न आने के बाद ओपीडी स्वयं संभाली। उन्होंने नेत्र रोग से संबंधित मरीजों की जांच कर परामर्श दिया। उनके पास करीब 200 मरीज ओपीडी में पहुंचे। इसके अलावा ओपीडी में करीब 630 मरीज पहुंचे। स्वास्थ्य विभाग ने एनसी मेडिकल कॉलेज और एनएचएम के 76 चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई। आपातकाल में स्थिति सबसे चिंताजनक रही। यहां कोई अनुभवी चिकित्सक नहीं मिला। जिसके चलते आपातकाल में आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं पोस्टमार्टम भी बंद रखा गया। बतरा कॉलोनी निवासी पारस के शव का पोस्टमार्टम नहीं किया जा सका। पारस की वीरवार को ट्रेन की चपेट में आने से मौत हुई थी। परिजन और जीआरपी के जांच अधिकारी पूरा दिन चिकित्सकों का इंतजार करे रहे।
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आपात कालीन विभाग में नहीं नजर आया कोई
तहसील कैंप निवासी पूनम ने बताया कि उसकी बहन प्रेम रानी को शुक्रवार अचानक दर्द हो गया। उसके हाथ और पैर ठंडे पड़ गए। वे उसको आपातकाल विभाग में लेकर आए। यहां उनको कोई चिकित्सक नहीं मिला। वे फिर सीएमओ के पास गए। इसके बाद प्रेम रानी का इलाज शुरू किया।
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दवा के इंतजार में बैठे रहे
गांजबड़ गांव निवासी गोवर्धन ने बताया कि उसके पैर में चोट लगी है। वह लंबे समय से अस्पताल में इलाज करा रहा है। शुक्रवार को सर्दी के मौसम में अस्पताल पहुंचा। यहां काफी देर तक चिकित्सक नहीं मिले। सीएमओ ने उनको दवा लेने को कही है। वह अब दवा लेने के लिए इंतजार में बैठा है।
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मुश्किल से हो पाई आंखों की जांच
गंगा देवी ने बताया कि वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश की रहने वाली है। पानीपत में अपने बेटे के पास रहती है। उसको आंखों से कम दिखाई देता है। वह शुक्रवार को आंखों की जांच कराने आई थी। उसकी आंखों की जांच मुश्किल से हो पाई। अब दवा के लिए इंतजार में बैठी हैं।
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सामूहिक अवकाश का नहीं पड़ा कोई प्रभाव
जिले में चिकित्सकों के सामूहिक अवकाश पर जाने से कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा है। जिला नागरिक अस्पताल में ओपीडी व आपातकालीन विभाग में मरीजों की जांच की गई। मैंने स्वयं ओपीडी में मरीजों की जांच की। इसके अलावा एनसी मेडिकल कॉलेज व एनएचएम में चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई गई। जिले में कहीं से स्वास्थ्य सेवाएं फेल होने की रिपोर्ट नहीं है।
डॉ. जयंत आहूता, जिला सिविल सर्जन।