पानीपत। सिविल अस्पताल के डॉक्टरों व नर्सिंग स्टाफ की लापरवाही से एक नवजात बच्चे का जीवन खतरे में पड़ गया है। पांच दिन पहले सिविल अस्पताल में पैदा हुए बच्चे को गुदा नहीं थी। डॉक्टरों व नर्सिंग ऑफिसर ने इसकी जांच नहीं की और बिना बताए परिजनों को बच्चे को सौंप दिया। मल न निकलने से बच्चे का पेट फूल गया। बुधवार को जब मां बच्चे को नहलाने लगी तो उसे इस बारे में पता चला। परिजन बच्चे को लेकर सिविल अस्पताल आए और डॉक्टरों व स्टाफ के खिलाफ जमकर हंगामा किया। इन्होंने डॉक्टरों पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए। इसकी शिकायत सिविल सर्जन को दी गई। सिविल सर्जन ने बाल रोग विशेषज्ञों को तुरंत कॉल कर बच्चे की सर्जरी के लिए प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए और डिप्टी सिविल सर्जन को मामले की जांच करने को कहा।
चांदनीबाग थानाक्षेत्र की एक कॉलोनी निवासी एक महिला ने बताया कि उसकी भाभी काजल ने छह अक्तूबर को सुबह पांच बजे नागरिक अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था। दो दिन तक जच्चा-बच्चा को यहां दाखिल रखा गया। सात अक्तूबर को नागरकि अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। बच्चे का मल नहीं निकल रहा था। इससे धीरे-धीरे उसका पेट फूल रहा था। बुधवार सुबह बच्चे को नहाते हुए काजल ने जांचा तो बच्चे को गुदा नहीं मिली। वो काफी डर गई। उसने इस बारे में उसके भाई विशाल को बताया। वह बच्चे को लेकर नागरिक अस्पताल आए। यहां डॉक्टरों ने उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया और रेफर करने लगे। डॉक्टरों की लापरवाही से बच्चे का जीवन खतरे में पड़ गया है। यहां इलाज में लापरवाही बरती गई है। डॉक्टरों व स्टाफ की जिम्मेदारी होती है कि जन्म के बाद नवजात की जांच की जाए। उनकी सिविल सर्जन ने मांग है कि लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की जाए।
संज्ञान में मामला आते ही डॉक्टर को तुरंत बच्चे का इलाज शुरू करने का निर्देश दिया गया। बच्चे का इलाज मेडिकल कॉलेज में कराया जाएगा। इस मामले में किसकी लापरवाही रही है, इसकी जांच की जाएगी। जो भी दोषी होगा, कार्रवाई करेंगे।
- डॉ. जयंत आहूजा, सिविल सर्जन