पानीपत। शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन शनिवार को मां चंद्रघण्टा की पूजा की जाती है। प्राचीन देवी मंदिर में अल सुबह ही भक्त पहुंच गए और फिर शाम को भक्तों ने माता के दर्शन किए। सुबह व शाम के समय आरती में भक्तों का उत्साह देखन वाला रहा। मंदिर में दर्शन करने वालों का सिलसिला देर शाम तक चलता रहा।
शनिवार को तीसरे नवरात्र पर भक्त अल सुबह ही उठ गए। उन्होंने घरों व मंदिर में माता की पूजा अर्चना की। महिलाओं ने दुर्गा सप्तशती के पाठ किए। इसके बाद परिवार के साथ सामूहिक आरती की गई। प्राचीन देवी मंदिर में अल सुबह ही भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया। यहां विधि विधान के साथ माता की पूजा की और दर्शनों के लिए कपाट खोले गए। सुबह करीब पांच बजे से दोपहर 12 बजे तक मंदिर में दर्शनों को लेकर भक्तों की लाइन लगी रही।देर रात करीब नौ बजे सांध्यकालीन आरती की गई। जिसमें भक्तों का उत्साह देखने वाला रहा।
पंडित प्रवीण शास्त्री ने बताया कि देवी भागवत पुराण के अनुसार मां चंद्रघण्टा बेहद सौम्य और शांत हैं। जो सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से आत्मविश्वास के साथ सुखों में वृद्धि होती है। इसके साथ सामाजिक प्रभाव भी बढ़ता है। उन्होंने बताया कि मां के मस्तक पर घंटे के आकार का चंद्रमा है। इसलिए उन्हें चंद्रघण्टा कहते हैं। मां चंद्रघण्टा का रूप अलौकिक, तेजस्वी और ममतामयी माना जाता है।
देवी मूर्ति कॉलोनी निवासी कविता ने बताया कि वह बचपन से नवरात्र रखती हैं। अब शादी के बाद भी नवरात्र रखती है। नवरात्र के दौरान फलाहार लेती है। वह अल सुबह मंदिर में आकर माता के दर्शन कर पूजा अर्चना करती है। वह सामान्य दिनों में भी लगभग मंदिर में आती हैं। ज्योति नगर निवासी आरती और दीपक ने बताया कि वे दोनों पिछले पांच साल से नवरात्र रख रहे हैं। इससे पहले पूजा में मन भी नहीं लगता था और जीवन में भी परेशानी थी। नवरात्र के व्रत शुरू करन के बाद उनके संकट कम होते चले गए।