पानीपत। हरियाणा सिविल डेंटल सर्जन एसोसिएशन ने सोमवार को काला बिल्ले लगाकर काम किया। डेंटल सर्जन ने अपनी मांगों को लेकर जिला सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा को ज्ञापन भी दिया है। एसोसिएशन ने अपनी आगामी रणनीति के बारे में भी ज्ञापन में जिक्र किया है। मंगलवार को एसोसिएशन उपायुक्त डॉ. वीरेंद्र कुमार दहिया को भी ज्ञापन देगी। बुधवार को डेंटल सर्जन दो घंटे की हड़ताल पर रहेंगे। एचसीडीएस के जिलाध्यक्ष डॉ. मनीष पाशी ने कहा कि उन्होंने पिछले 16 सालों से लंबित मांगों को पूरा करवाने के लिए गांधीवादी तरीके से आवाज उठाई है। मेडिकल ऑफिसर और डेंटल सर्जन एक ही छत के नीचे एक जैसा काम करते हैं लेकिन उनका वेतनमान अलग-अलग है। इसके साथ ही उन्होंने एसीपी में भेदभाव किया गया है। मेडिकल ऑफिसर को क्लास वन व डेंटल सर्जन को क्लास द्वितीय अधिकारी माना जाता है। डेंटल सर्जन को पांच साल में 100 प्रतिशत वेतन, 11 साल में 25 प्रतिशत वेतन तथा 17 साल बाद तीसरी एसीपी में मात्र 20 प्रतिशत वेतन मिल रहा है। उन्हें डॉक्टर ही नहीं माना जाता। उन्हें लगता है कि बीडीएस की पढ़ाई एमबीबीएस के मुकाबले काफी सरल है।
हरियाणा के आसपास के सभी राज्यों जैसे दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान आदि में मेडिकल ऑफिसर और डेंटल सर्जन एक ही वेतनमान पर काम कर रहे हैं लेकिन हरियाणा में ऐसा नहीं है। डेंटल सर्जन के बाद प्रमोशन में सीनियर डेंटल सर्जन और डिप्टी सिविल सर्जन का ही पद है और उसके बाद डायरेक्टर, जबकि लंबे समय से मांग चल रही है कि उनके लिए डिप्टी डायरेक्टर के भी दो पद सृजित किए जाएं। इस मौके पर डॉ. ललित वर्मा, डॉ. दिव्या, डॉ. विशाल छाबड़ा, डॉ. गिरिश अरोड़ा मौजूद रहे।