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मां कुष्मांडा की पूजा कर मांगी मन्नते,आज करेंगे स्कंदमाता की पूजा

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नवरात्र में चौथे दिन भक्तों ने देवी मंदिर व अन्य मंदिरों में मां कूष्मांडा की पूजा कर मन्नतें मांगीं। जिले के सबसे बड़े देवी मंदिर में पानीपत समेत अन्य जिलों से दिन भर में पांच हजार से ज्यादा श्रद्धालु देवी मंदिर में माता के दर्शन करने आए। मंदिर के अंदर बिना मास्क वाले श्रद्घालुओं को प्रवेश नहीं दिया गया। माता के भक्त इन दिनों मां के नौ स्वरूपों की आराधना बड़ी श्रद्धा-भक्ति के साथ कर रहे हैं। नवरात्रि में दुर्गा की उपासना के चौथे दिन की पूजा का अत्यधिक महत्व होता है। मां दुर्गा के चौथे स्वरूप का नाम कूष्मांडा है। नवरात्र उपासना में चौथे दिन इन्हीं के विग्रह का पूजन-आराधना की जाती है। इस दिन साधक का मन अनाहत चक्र में स्थित होता है। इस दिन उसे अत्यंत पवित्र और निश्छल मन से कूष्मांडा देवी के स्वरूप को ध्यान में रखकर पूजा-उपासना के कार्य में लग्न रहना चाहिए। नवरात्र का पांचवां दिन मां स्कंदमाता को समर्पित होता है। इस दिन देवी दुर्गा के स्कंदमाता की पूजा-आराधना होती है। भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र भगवान कार्तिकेय का एक अन्य नाम स्कंद है। पौराणिक कथा के अनुसार तारकासुर नामक राक्षस था। जिसकी मृत्यु केवल शिव पुत्र से ही संभव थी। तब मां पार्वती ने अपने पुत्र भगवान स्कंद को युद्ध के लिए प्रशिक्षित करने हेतु स्कंद माता का रूप लिया और उन्होंने भगवान स्कंद को युद्ध के लिए प्रशिक्षित किया था। स्कंदमाता से युद्ध प्रशिक्षण लेने के पश्चात भगवान स्कंद ने तारकासुर का वध किया।
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