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कमेटी को जांच के दौरान सहकारी शुगर मिल में मिला 80 हजार क्विंटल कम शीरा

Sun, 11 Sep 2016 12:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत।
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 सहकारी चीनी मिल में शीरा घोटाले की गंध आने लगी है। मामला सामने आने के बाद उच्च अधिकारी जांच में जुटे हुए हैं। इसके बाद मिल अधिकारियों के माथे पर चिंता की लकीर खींच गई है। सूत्रों की माने तो शुगरफैड ने मामले में कमेटी गठित की थी। इस कमेटी को जांच में करीब 80 हजार क्विंटल शीरा कम मिला है। इसकी बाजार कीमत लगभग छह करोड़ रुपये बताई जा रही है। फिलहाल कमेटी मामले में जांच कर रही है। फाइनल रिपोर्ट आने के बाद ही मामला साफ हो सकेगा।
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सहकारी चीनी मिल में चार अप्रैल को गठित की गई कमेटी को फिजिकल वेरिफिकेशन रिपोर्ट में शीरे की मात्रा लगभग एक लाख पांच हजार क्विंटल मिली थी। इसके बाद शुगरफैड की जांच कमेटी को एक सितंबर के दिन पानीपत सहकारी चीनी मिल की शराब फैक्टरी में करीब 80 हजार क्विंटल शीरा कम मिला। इस पर जांच के लिए शुगरफैड पंचकूला से एक विशेष जांच टीम पानीपत पहुंची। उसने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी। जांच दल को जांच में पता चला कि मिल की शराब फैक्टरी में अधिकारियों की मिलीभगत से घोटाला किया गया। मिल डायरेक्टर गुलाब सिंह, भूप सिंह, जितेंद्र और रणबीर ने भी सामने आकर मिल अधिकारियों पर इसके आरोप लगाए और जांच रिपोर्ट स्पष्ट करने की मांग की।
50 लाख की लग चुकी है पेनल्टी
डायरेक्टरों के अनुसार शुगर मिल अधिकारियों की लापरवाही के चलते मिल की डिस्टलरी यूनिट उत्पादित एथनोल की निर्धारित मात्रा की सप्लाई नहीं कर सकी। इस वजह से चार महीने में करीब 50 लाख की पेनल्टी मिल की डिस्टलरी यूनिट पर लग चुकी है। डिस्टलरी यूनिट करीब एक महीने से बंद पड़ी है। आरोप है कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण उत्पादन के लिए जरूरी कच्चा माल समय पर उपलब्ध नहीं करवाने से यह स्थित बनी है। इस कारण यूनिट को करीब एक करोड़ रुपये हर माह नुकसान हो रहा है।
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बैंक से लेना पड़ रहा पैसा उधार
शुगर मिल डायरेक्टरों ने आरोप लगाया कि मिल अधिकारियों ने मिल द्वारा उत्पादन चीनी की बिक्री में उठान के समय में सीमा की पास्ट प्रेक्टिस में बदलाव करते हुए मनमर्जी की छूट दी है। एजेंट चीनी का पैसा अपनी सुविधा अनुसार जमा करवाता है और चीनी व्यापारी आगामी दिनों में बढ़े हुए रेट पर बेचकर मुनाफ कमाता है। इस मुनाफे में मिल अधिकारियों और अन्य का हिस्सा होता है। मिल के घाटे में होने के कारण बैंक से पैसा उधार लेना पड़ता है। चीनी बिक्री के बाद यह पैसा बैंक को वापस कर दिया जाता है। मिल को देरी से चीनी बिक्री का पैसा मिलने के कारण अनावश्यक ब्याज बैंक को देना पड़ता है।

...तो विजिलेंस से करेंगे शिकायत
मिल डायरेक्टर राजेंद्र और ललित ने बताया कि शुगर मिल एमडी ने ही शुगरफैड को 24 अगस्त को शराब फैक्टरी में गड़बड़ी की शिकायत की थी। इसके बाद शुगर फैड ने पांच अधिकारियों की एक जांच कमेटी गठित की। यही कमेटी मामले की जांच कर रही है। उन्होंने बताया कि इन्हीं आरोपों में डिस्टलरी मैनेजर निलंबित चल रहे हैं।  

मैंने ही शुगर मिल शराब फैक्टरी के शीरे में गड़बड़ी की शिकायत उच्च अधिकारी से की थी। इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। कमेटी द्वारा जांच रिपोर्ट के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
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मेजर गायत्री अहलावत, एमडी शुगर मिल, पानीपत। 
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