पानीपत। गीता कॉलोनी निवासी जूतों के होल सेलर दुकानदार ने देनदारी में मिल रही धमकियों से परेशान हो फंदा लगाकर जान दे दी। दुकानदार ने चार पेज के सुसाइड नोट में जूतों के दो व्यापारियों को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया है। दुकानदार का आरोप है कि दोनों व्यापारी उसे देनदारी को लेकर लगातार नुकसान पहुंचाने की धमकी दे रहे थे। सुसाइड नोट में अपनी पत्नी के लिए लिखा कि वह उसका आभारी है, लेकिन 25वीं सालगिराह पर उसको देने के लिए उसके पास कुछ भी नहीं है। थाना शहर पुलिस ने सुसाइड नोट के आधार पर दोनों व्यापारियों के खिलाफ आत्महत्या को मजबूर करने का मुकदमा दर्ज कर लिया है। पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया गया है।
पुलिस के अनुसार थाना शहर के अंतर्गत गीता कॉलोनी निवासी महेश बतरा उर्फ टोनी ने अपनी गीता कॉलोनी स्थित दुकान में मंगलवार सुबह नाइलोन की बेल्ट के सहारे पंखे से लटक कर जान दे दी। महेश जूतों के होल सेलर थे। उन्होेंने चार पेज का एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है। इसमें उन्होंने हर्ष मक्कड़ निवासी सुखेदव नगर और हरीश सेठी को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया है। महेश के भाई सुनील ने बताया कि उनके भाई के दो बेटे और एक बेटी है। महेश की मकान के नीचे वाले कमरे में जूतों की दुकान है। वह जूता व्यापारी हर्ष मक्कड़ और हरीश सेठी के साथ कारोबार करते थे। दोनों को महेश के एक लाख रुपये देने थे। दोनों ने धोखाधड़ी कर महेश पर ही एक लाख रुपये की देनदारी निकाल दी।
दोनों आए दिन महेश को पैसों के लिए परेशान करते थे। जान से मारने की धमकी तक दे रहे थे। दोनों ने महेश को पूरे बाजार में बदनाम कर दिया था। इससे महेश परेशान रहने लगा। सुनील ने दावा किया कि इस वजह से ही महेश ने रात को दुकान में आकर बेल्ट से फंदा लगाकर जान दे दी। सुबह बेटे लौकिक ने पिता महेश को फंदे पर लटके देखा। सूचना पर पहुंची थाना शहर पुलिस ने शव को सिविल अस्पताल भिजवाया। महेश की मौत की सूचना पर भाजपा नेता सुरेंद्र रेवड़ी भी पहुंच गए। भाजपा नेता ने पुलिस से आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने आरोपी हरीश सेठी और हर्ष मक्कड़ के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज कर लिया है।
पापा बोले थे, नीचे दुकान में जा रहा हूं, हिसाब जोड़ना है
लौकिक ने बताया कि उसके पिता महेश रात को पानी पीने के लिए कमरे में आए थे। बर्तन की आवाज सुनकर उसकी आंख खुल गई। उस वक्त उसके पिता बहुत परेशान थे। उसने पिता से पूछा तो बोले कि नीचे दुकान में जाना है। हिसाब पेंडिंग है। उसे जोड़ना है। उन्होंने सुबह कमरे में देखा तो पिता बेड पर नहीं थे। दुकान में आकर देखा तो पिता फंदे पर लटके मिले।
सुसाइड नोट में बताईं मजबूरियां
महेश बतरा ने चार पेज के सुसाइड नोट में पत्नी और बच्चों को मजबूरियां बताईं। लिखा कि उसके पास पत्नी सुनीता और बच्चों के लिए कुछ नहीं बचा। दुकान के उधार के पैसे भी नहीं आ रहे है। परिवार भी परेशान है। लोग उन्हें नुकसान पहुंचाने की धमकी दे रहे है। उसके पास ऊपर जाने के लिए अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।
पत्नी को लिखा, मैं तुम्हारा आभारी हूं
महेश बतरा ने सुसाइड नोट मेें सबसे पहले पत्नी सुनीता बतरा के लिए लिखा कि वह उसका आभारी है कि उसने 25 साल एक फेलियर के साथ गुजार दिए। उसके पास 25वीं सालगिरह पर उसको देने के लिए कुछ नहीं है। यह बात उसे दिन-रात सोने नहीं देती। आप बहुत अच्छी हो। मैं तुम्हारा अहसान सात जन्म तक नहीं उतार पाऊंगा।
सबको एक दम ही पैसे चाहिए, मकान कैसे बेचूं
सुसाइड नोट में कहा कि व्यापारियों बहुत कर्जा हो गया है। हर रोज लोग उन्हें धमकी दे रहे है। सब एक साथ ही पैसे मांग रहे है। वह इतने पैसे कहां से लेकर आए। एक बार सोचा कि मकान बेचकर कर्जा उतार दूं, लेकिन मकान को कौड़ियों के भाव नहीं बेच पाया।
तुम्हें कुछ न हो, इसलिए मैं जा रहा हूं
सुसाइड नोट में परिवार के लिए लिखा कि लोग उन्हें बार-बार उनके परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी दे रहे हैं। उन्हें लगता है कि यदि वे और जीवित रहे तो धमकी देने वाले उसकी पत्नी और बच्चों को नुकसान पहुंचा देंगे। उसका अब जीने का कोई फायदा नहीं है। परिवार को कुछ न हो, इसलिए वह सबको छोड़कर जा रहा है। सब एक दूसरे का ख्याल रखा।
पुलिस सूचना मिलते ही पहुंच गए थे। पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया है। पुलिस को महेश के पास से चार पेज का सुसाइड नोट मिला है। इसमें मृतक ने दो जूता व्यापारियों हर्ष मक्कड़ और हरीश सेठी का नाम लिखा है। दोनों आरोपी व्यापारियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
सुरेश कुमार, प्रभारी थाना शहर पानीपत।