शहरी क्षेत्र खुले में शौच करने वाले किसी को उठक-बैठक तो किसी को जुर्माने का भय दिखाया। अब शहर खुले में शौच से मुक्ती की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। अधिकारियों के अनुसार शहर का 80 प्रतिशत से अधिक भाग खुले में शौच से मुक्त हो गया है। शेष रहे 20 प्रतिशत भाग को भी इस माह के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। निगम अधिकारियों का दावा है कि पब्लिक और मोबाइल टायलेट इंस्टॉल होने के बाद इस अभियान को तेजी से पूर कर लिया जाएगा। अभियान को सफल बनाने के लिए निगम अधिकारी अल सुबह और शाम के समय बाहरी क्षेत्र में लगातार गश्त कर लोगों सीटी बजाकर या जुर्माने का भय दिखाकर जागरूक कर रही हैं।
जिले को ग्रामीण क्षेत्र में खुले में शौच मुक्त का पुरस्कार मिलने के बाद नगर निगम क्षेत्र को खुले में शौच से मुक्त बनाने के लिए अक्तूबर में काम शुरू कर दिया गया था। नगर निगम की कमिश्नर वीना हुड्डा ने खुद इसकी कमान संभाली। उन्होंने टीम बनाकर लगातार अभियान चलाया। निगम अधिकारियों की माने तो अब तक खुले में शौच मुक्त अभियान 80 प्रतिशत तक सफल हो चुका है। निगम अधिकारियों ने शेष 20 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने के लिए फरवरी महीने की सीमा निर्धारित की है।
लोगों ने दिक्कत बताई तो सार्वजनिक और मोबाइल टॉयलेट बनवाए
नगर निगम अधिकारियों को ओडीएफ अभियान शुरू करते ही सबसे ज्यादा दिक्कत सार्वजनिक शौचालय न होने की सामने आई। नगर निगम अधिकारियों ने इसके बाद सार्वजनिक और मोबाइल टायलेट स्थापित करने शुरू कर दिए। निगम के एक अधिकारी के अनुसार शहर में 30 सार्वजनिक सुलभ शौचालय बनाने का प्रस्ताव पास किया गया है। इनमें से चार सार्वजनिक शौचालय बनकर तैयार हैं। शेष 26 का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। एक टायलेट पर 11 से 12 लाख रुपये की लागत आने का अनुमान है। ठेकेदार को एक साल की मरम्मत के साथ सार्वजनिक शौचालय दिए गए हैं। ऐसे में सार्वजनिक शौचालय में गंदगी भी नहीं फैलेगी। अभियान सफल बनाने के लिए इसके साथ ही 50 लाख की कीमत के 12 मोबाइल टायलेट शहर में स्थापित किए गए हैं।
2011 के सर्वे में 11 हजार के पास नहीं थे टायलेट
नगर निगम के आकड़ों पर नजर डालें तो 2011 के सर्वे अनुसार 11 हजार मकानों में टायलेट नहीं थे। इस दौरान 50 प्रतिशत लोगों ने अपने स्तर पर टायलेट बना लिए। अब करीब पांच हजार लोग टायलेट के बिना मिले हैं। इन लोगों को टायलेट बनाने की ग्रांट देने की बजाय सार्वजनिक शौचालय बनाने का फैसला लिया है। निगम का मानना है कि शहर में सार्वजनिक शौचालय होने के बाद बाजार में आने वाले लोगों को भी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
पहले समझा रहे फिर दंड का भय दिखा रहे
एमई अंकित लौहान ने बताया कि खुले में शौच करने वालों को पहले समझाया जाता है। वे ही लोग दोबारा मिल जाते हैं तो उनसे उठक-बैठक कराई जाती है। कई को जुर्माना लगने का भय दिखाया जाता है। इन सबके चलते लोग कुछ समझने लगे हैं। नगर निगम को ओडीएफ के यहां तक पहुंचाने में अपने दो कर्मियों को भी खोना पड़ा है। एक कर्मी पानीपत-जींद रेलवे लाइन पर ट्रेन की चपेट में आ गया था, जबकि एक कर्मी की सर्पदंश से मौत हो गई थी।
शहर को ओडीएफ बनाने के लिए तेजी से काम चल रहा है। इस माह लक्ष्य को पूरा कर दिया जाएगा। लोगों को खुले में शौच करने से होने वाली हानियों के बारे में बताया जा रहा है। सब इस बात को समझ रहे हैं और खुले में शौच जाने में परहेज कर रहे हैं।
वीना हुड्डा, कमिश्नर, नगर निगम पानीपत।