फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चरस के खेल में अब फंसा मतलौडा एसएचओ

Thu, 26 May 2016 12:38 AM IST
beaure/panipat,amar ujala
विज्ञापन
विज्ञापन
चरस के खेल में अब थाना मतलौडा प्रभारी राजेंद्र सिंह आरोपों के घेरे में है। एक तस्कर से भारी मात्रा में बरामद चरस को लाखों रुपये लेकर बहुत कम मात्रा में दिखाने का मामला संज्ञान में आने के बाद आईजी रोहतक ने उनके खिलाफ जांच बैठा दी है। एसपी ने बुधवार को एसएचओ से इस बारे में पूछताछ की। वीरवार को पूरे मामले से पर्दा उठने की उम्मीद है।
विज्ञापन



 थाना मतलौडा पुलिस ने तस्कर राजेश कुमार से दो से छह किलोग्राम तक चरस बरामद की थी। लेकिन आरोप है कि पुलिस ने मात्र 190 ग्राम चरस बरामद दिखा कर मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। मामले में थाना मतलौडा प्रभारी राजेंद्र सिंह पर आरोप हैं कि दस लाख रुपये की राशि लेकर उन्होंने बरामद चरस की मात्रा घटा दी।

यह है मामला
मतलौडा थाना पुलिस ने गांव नारा के पास नाका लगाकर राजेश कुमार निवासी नारा को 190 ग्राम चरस के साथ काबू किया था। थाना पुलिस ने सब इंस्पेक्टर दिनेश कुमार की शिकायत पर राजेश कुमार के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था। मामले में एएसआई अनिल कुमार जांच अधिकारी हैं। तस्कर को कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। अब चर्चा है कि बरामद चरस 190 ग्राम नहीं बल्कि कई किलो ग्राम में थी।
विज्ञापन



दोनों के ही वारे न्यारे
चरस तस्करी के इस मामले को देखें तो पुलिस अधिकारी जहां मालामाल हुए हैं, वहीं तस्कर का मामला भी कोर्ट में हल्का पड़ सकता है। साथ ही चरस की खेप भी सही जगह पर पहुंच गई। एडवोकेट पवन खुराना के अनुसार कुछ हैवी मादक पदार्थ के अलावा चूरा पोस्त जैसे मादक पदार्थों की बरामदगी की मात्रा आरोपियों की सजा को भी प्रभावित करती है।

कानून के अनुसार मादक पदार्थ तस्कर से पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में बरामदगी होनी चाहिए। ऐसा न होने पर व सबूतों के अभाव में आरोपी अदालत में बरी हो जाते हैं। मादक पदार्थ तस्कर को 14 साल की कैद व दस लाख का जुर्माने की सजा का प्रावधान है। कई बार कोर्ट में मामला स्पष्ट न होने पर आरोपी कोर्ट से बरी हो जाता है या फिर सजा नाममात्र की मिल पाती है।


मतलौडा के थाना प्रभारी राजेंद्र सिंह पर पकड़े गए आरोपी से चरस कम मात्रा में दिखाने और इसकी एवज में पैसे लेने का आरोप है। उन्होंने एसपी राहुल शर्मा को पूरे मामले की जांच कर जल्द रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार एसएचओ पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
संजय कुमार, आईजी, रोहतक रेंज।

 
पैसे के लालच में खाकी, सात पुलिसकर्मियों पर गाज
दिसंबर से मई माह के बीच पांच थानेदारों को रिश्वत लेने के आरोप में जेल की हवा खानी पड़ी है। एक थानेदार की धरपकड़ के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है, जबकि मतलौडा प्रभारी राजेंद्र सिंह भी ड्रग्स के खेल में आरोपों के घेरे में हैं। थानेदारों की हरकत से पुलिस के उच्च अधिकारी चिंतित है।


दिसंबर माह समालखा चूरापोस्त बहुचर्चित मामले में चार थानेदारों के 30 लाख की रिश्वत लेने के आरोप में जेल में जाने के बाद भी थानेदार कोई सबक नहीं ले रहे हैं। हर रोज पुलिस कर्मियों पर रिश्वत मांगने के आरोप लग रहे हैं। एक दर्जन से अधिक पुलिस कर्मियों की रिश्वत मांगने के आरोप में विभागीय जांच चल रही है।

पांच माह में इन थानेदारों पर गाज
गत 31 दिसंबर को तत्कालीन आईजी श्रीकांत जाधव के आदेशानुसार सीआईए टू के एसआई कृष्ण कुमार, देवेंद्र सिंह एएसआई जयबीर व नरेश के खिलाफ पुलिस में मुकदमा दर्ज हुआ था। आरोप था कि चारों थानेदारों ने 22 क्विंटल चूरापोस्त मामले में 30 लाख रुपये की रिश्वत लेकर आरोपी को छोड़ दिया था। चारों थानेदार फिलहाल जेल में है।

-अप्रैल माह में समालखा पुलिस चौकी में तैनात एएसआई संतराम पर पांच हजार रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगा था। विजिलेंस ने एएसआई संतराम को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। संतराम फिलहाल करनाल जेल में बंद है।
- नौ मई को तहसील कैंप चौकी में तैनात एएसआई बृजपाल की 15 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए वीडियो वायरल हुई थी। मामले को देखते हुए एसपी राहुल शर्मा ने एएसआई ब्रिजपाल को ड्यूटी से निलंबित कर उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें