डेरों पर लूटपाट और खेतों में चोरी करने वाला यूपी का गिरोह वहां पहले मजदूरी करने के बहाने रेकी करता था। फिर किराए के कमरे में योजना बनाकर रात के अंधेरे में वारदात को अंजाम दिया जाता था। बदमाश वारदात के दौरान भी रास्तों पर अपने साथियों को राहगीरों पर नजर रखने के लिए खड़ा कर जाते थे।
गैंग आने-जाने के लिए एक ही रास्ते का प्रयोग किया जाता था और अपने साथी के कहे अनुसार कई बार रास्ता भी बदल लेते थे। बदमाश इतने शातिर थे कि वारदात के दौरान अपना मोबाइल या पहचान के लिए कुछ भी साथ नहीं रखते थे। यही कारण था कि मतलौडा थानाक्षेत्र के एक गांव के दो डेरों पर लूटपाट और सामूहिक दुराचार की वारदात को सुलझाने में पुलिस 13 दिन पसीना बहाना पड़ा।
वारदात से एक दिन पहले सरगना पहुंचा था पानीपत
गिरफ्तार आरोपी जयभगवान ने बताया कि 19 सितंबर को सरगना समेत तीनों साथी उत्तर प्रदेश से पानीपत आए थे। 20 सितंबर को चारों पहले महेंद्रपाल के डेरे पर पहुंचे। वहां से उन्होंने पांच हजार रुपये और एक फोन लूटा। उसके बाद वह दूसरे डेरे पर गए, जहां उन्होंने तीन महिलाओं के साथ सामूहिक दुराचार कर 13 हजार रुपये व जेवरात लेकर फरार हो गए। वारदात के बाद वे यूपी भाग गए थे। वहां अलग-अलग ठिकानों पर रुके थे।
डेरों पर रहने वाले लोगों को बनाते थे साफ्ट टारगेट
एसपी अजीत सिंह शेखावत ने बताया कि आरोपियों का गैंग डेरों पर रहने वाले प्रवासी मजदूरों को अपना टारगेट बनाता था। डेरे से बिजली का तार काटने, लोगों से लूटपाट की वारदात को अंजाम देते थे। वारदात के बाद उन्हें जान से मारने व डेरे खाली करने के लिए इसलिए कहते थे ताकि पीड़ित परिवार डरकर अपने गांव चला जाए और वह पुलिस को शिकायत न दे पाए। वे गुमराह करने के लिए हरियाणवी बोली का भी प्रयोग करते थे। पुलिस शुरू में इसी को आधार बनाकर आसपास के बदमाशों से संदेह के आधार पर पूछताछ कर रही थी।
डेरे पर पहुंचते ही तोड़ते थे फोन, ताकि पुलिस को फोन कर पाएं -
मास्टरमाइंड ने अपने साथियों के साथ कुछ नियम बना रखे थे, ताकि वे पुलिस की पकड़ से बच सकें। गैंग के सदस्य किसी डेरे पर पहुंचते तो प्रवासी मजूदरों के फोन छीनकर तुरंत तोड़ देते थे या उसका सिमकार्ड निकालकर फेंक देते थे ताकि वे पुलिस को सूचना न दे सकें।
युवाओं को करते थे वारदात में शामिल
गैंग के सरगना का पहले भी आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। हरियाणा के अलावा उत्तर प्रदेश में 12-13 मुकदमे दर्ज हैं। वह एक वारदात में जब मुजफ्फरनगर जेल में बंद था तो उसने जेल में बंद अन्य साथियों के साथ गैंग बनाई। इसमें मुख्य तीन आरोपी हैं, जो फिलहाल फरार हैं। गैंग में 20 से 30 साल के युवा शामिल हैं। एक आरोपी की आयु 40 वर्ष है।
आठ में दो सगे भाई वारदात में शामिल
पुलिस के अनुसार आरोपियों की आठ सदस्यों की गैंग है। इनमें पुलिस जयभगवान, नवीन और सोनू को गिरफ्तार कर चुकी है। नवीन को रेकी करने और सोनू को आईपीसी की धारा 412 के तहत गिरफ्तार किया गया है। इस धारा में चोरी की गई संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करना और रखना शामिल होता है। सोनू का भाई राजू भी इस गैंग का सदस्य है। वह भी फरार है।