झारखंड के एक आदिवासी परिवार की किशोरी को जिले के गांव सींक से बरामद किया गया है। आरोप है कि झारखंड के एक युवक ने उसके साथ पहले बहला फुसलाकर शादी की। इसके बाद उसे सींक निवासी अनिल को 70 हजार रुपये में बेच दिया। आरोप है कि अनिल अब उसके साथ जानवरों से भी बदतर व्यवहार करता था। जिले में मानव तस्करी का मामला सामने आने के बाद प्रशासन और पुलिस के होश उड़ गए है। पुलिस ने देर शाम को नाबालिग को बरामद कर बयान दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। नेशनल कैंपेन कमेटी फॉर इरेडिकेशन ऑफ बॉन्डेड लेबर ने बच्ची के बरामद होने पर सरकार से प्रदेश में टास्क फोर्स गठित कर घरेलू कामगारों का सर्वे कराने की मांग की है। थाना मतलौडा पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है।
दिल्ली की नेशनल कैंपेन कमेटी फॉर इरेडिकेशन ऑफ बॉन्डेड लेबर के संयोजक निर्मल गोराना के साथ एसडीएम पानीपत विवेक चौधरी, थाना मतलौडा पुलिस बुधवार को जिले के गांव सींक पहुंची। प्रशासन और पुलिस टीम ने सींक निवासी अनिल के मकान से झारखंड के साहिबगंज जिले के बेरगोट गांव की आदिवासी किशोरी को बरामद किया। संस्था का आरोप है कि किशोरी को बंधुआ मजदूर की तरह रखा जा रहा है। उसके साथ हर रोज दुराचार भी हो रहा है। प्रशासनिक और पुलिस टीम ने किशोरी को बरामद किया और देर शाम लघु सचिवालय स्थित सीडब्ल्यूसी कार्यालय पहुंचे। वहां पर पीड़िता के बयान दर्ज कर मेडिकल करवाया गया। इसके बाद परिजनों को सौंप दिया गया।
आदिवासी ने ही की थी शादी, फिर सोनीपत लाकर बेचा
संस्था के संयोजक निर्मल गोराना के अनुसार झारखंड निवासी महेश्वर झारखंड के जिले साहिबगंज निवासी किशोरी को जून माह में बहला फुसलाकर ले आया। उसके साथ शादी कर ली। वह पीड़िता को सोनीपत ले आया। वहां उसे किसी स्थान पर रखा। सींक गांव निवासी अनिल सोनीपत पहुंचा। वहां उसने उसका 70 हजार रुपये में सौदा कर दिया। महेश्वर एक-दो दिन में वापस आने की कहकर चला गया। आरोप है इसके बाद अनिल उसको अपने साथ अपने गांव सींक ले आया।
गांव में पत्नी बताया, घर जाने की बात पर करता था मारपीट
पुलिस ने बताया कि अनिल ने गांव में आकर किशोरी का नाम मंजू बताया। सभी से उसने नाती के साथ शादी करने की बात कही थी। ग्रामीण भी नाबालिग को उसकी पत्नी मानने लगे थे। आरोप है कि अनिल उसके साथ हर रोज दुराचार करता था। कुछ लोगों ने बताया कि वह उसको पहनने के लिए ठीक-ठाक कपड़े और गहने भी देता था। यहीं नहीं उससे लगातार घर और खेत का काम करवा रहा था। उसको इसके बदले एक पैसा भी नहीं देता था।
पहले ग्रामीण विरोध में उतरे, फिर दिया दिलासा
प्रशासनिक और पुलिस टीम के गांव में पहुंचने पर कुछ ग्रामीण अनिल के समर्थन में उतर आए। उन्होंने अनिल को जायज ठहराया और किसी तरह की कार्रवाई न करने तक की चेतावनी दी। अनिल ने प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को लड़की के साथ शादी का सर्टिफिकेट दिखाया। उसने इसमें उसका नाम मंजू दिखाया था। संस्था ने उसका असली नाम बताते हुए उसका आधार कार्ड और अन्य सबूत पेश किए। बताया जा रहा है किशोरी को जाते देख अनिल ने उसके गहने उतरवा लिए। ग्रामीणों ने लड़की के जाने के बाद अफसोस जताया कि अब तो अनिल के 70 हजार रुपये भी गए।
संस्था ऐसे बच्ची तक पहुंची
बताया जा रहा है कि किशोरी ने किसी तरह से बचकर अपने परिवार को फोन कर दिया। उसके भाई ने झारखंड की संस्थान वीडियो वालंटियर संगठन को इस बारे में बताया। संगठन ने एक माह पहले दिल्ली की संस्था नेशनल कैंपेन कमेटी फॉर इरेडिकेशन ऑफ बोन्डेड लेबर के संयोजक निर्मल गोराना से संपर्क किया। उन्होंने सबूत जुटाए और ह्यूमन राइट लॉ नेटवर्क से कानूनी मदद मांगी। वह बुधवार को एसडीएम विवेक चौधरी, तहसीलदार पानीपत जिवेंद्र मलिक, चाइल्ड लाइन की डायरेक्टर सुनीता, सीडब्ल्यूसी की सदस्य किरण और थाना मतलौडा
पुलिस के साथ सींक पहुंचे।
संस्था ने प्रदेश सरकार से सर्वे कराने की मांग की
नेशनल कंपेन कमेटी फॉर इरेडिकेशन ऑफ बॉन्डेड लेबर के संयोजक निर्मल गोराना ने बताया कि हरियाणा और पंजाब में बहुत से लोगों को बंधुआ बनाया गया है। ये लोग उन्हें घरेलू और कागमारों के तौर रखा जाता है। इनमें कुछ लड़कियां और महिला भी हैं। सींक से बरामद लड़की ने भी इस बात की पुष्टि की है। उसका कहना है कि इस तरह की कई लड़कियां आसपास के गांवों में हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार से टास्क फोर्स गठित कर सर्वे कराने की मांग की।
पुलिस को प्रशासन और एक संस्था से सींक गांव में एक नाबालिग को बंधुआ बनाकर रखने की सूचना मिली थी। पुलिस सूचना मिलते ही गांव में पहुंच गई थी। इस मामले में सींक निवासी आरोपी अनिल पर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
धर्मवीर सिंह, प्रभारी, थाना मतलौडा।