पानीपत। शहर से सटे गांव नांगल खेड़ी का सरकारी स्कूल छह साल में भी अपग्रेड नहीं हो पाया। स्कूल में पढ़ने वाली छात्राएं ग्राम पंचायत से प्रस्ताव पास कराकर शिक्षा और प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री तक से गुहार लगा चुकी हैं। शिक्षा विभाग के नॉर्म्स के चलते अपग्रेडेशन खारिज करने के बाद छात्राओं ने पंचायत बुला ली। उन्होंने अपनी आगे की पढ़ाई के लिए स्कूल को अपग्रेड कराने के लिए समर्थन मांगा। इसके बाद छात्राओं ने स्कूल पर सांकेतिक रूप से ताला जड़ दिया। छात्राएं करीब चार घंटे तक धूप में खड़ी रहीं, लेकिन कोई भी अधिकारी नहीं पहुंचा। छात्राओं ने सोमवार से स्कूल के बाहर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है।
गांव नांगल खेड़ी में लंबे समय से स्कूल को 10वीं से अपग्रेड कर 12वीं कक्षा तक करने की मांग को लेकर चला आ रहा छात्राओं का संघर्ष शनिवार को तेज हो गया। वे शनिवार सुबह महिला सरपंच सुतन मलिक के पास पहुंची और इस मामले में उनसे समर्थन मांगा। छात्राओं ने सुमन मलिक को साथ लेकर ग्रामीणों की पंचायत बुलाई। इसमें ग्रामीणों ने उनको समर्थन देने का आश्वासन दिया। इस मौके पर सरपंच पति कर्मबीर मलिक, पूर्व सरपंच राजबीर कादियान, हरलाल मलिक, रामफल कादियान, मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन डॉ. कर्ण सिंह कादियान आदि मौजूद रहे।
छात्राओं ने चार घंटे तक स्कूल को रखा बंद
ग्राम पंचायत का समर्थन मिलने के बाद छात्राएं सरकारी स्कूल पहुंचीं और वहां गेट पर ताला लगा दिया। कहा कि राजकीय हाईस्कूल अपग्रेड करने के लिए छह साल से संघर्ष कर रहे हैं। शिक्षा अधिकारी हर बार आब्जेक्शन लगा देेते हैं। सिवाह और दूसरे स्कूल को जाने वाला रास्ता लड़कियों के लिए सुरक्षित नहीं है। अभिभावक वहां जाने नहीं देते।
पहले स्कूली शिक्षा को मजबूत करें
छात्राओं ने कहा कि प्रदेश सरकार हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा कर रही है, लेकिन जब बच्चों को स्कूली शिक्षा ही नहीं मिलेगी तो वे मेडिकल कॉलेज कैसे पहुंचेंगे। सरकार को मेडिकल कॉलेजों से पहले स्कूली शिक्षा को मजबूत बनाना चाहिए। वे गत दिनों सेक्टर-13/17 में आयोजित प्रदेश स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मिलने गई थीं। वहां उनका मांग पत्र लेकर मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का आश्वासन दिया गया।
गांव की ये है रियल रिपोर्ट
नांगल खेड़ी गांव शहर से सटा है। गांव की जनसंख्या करीब 15 हजार है। राजकीय हाईस्कूल में 1300 बच्चे पढ़ते हैं। इनमें करीब 800 लड़कियां हैं। नौवीं और दसवीं में करीब 200 विद्यार्थी हैं। इनमें से करीब 90 लड़कियां हैं। स्कूल में नांगल खेड़ी गांव के अलावा सेक्टर-29 में रहने वाली श्रमिकों के बच्चे भी पढ़ने आते हैं।
विभाग का यह है आब्जेक्शन
राजकीय उच्च विद्यालय नांगल खेड़ी को अपग्रेड करने का संघर्ष करीब छह साल से चल रहा है। शिक्षा विभाग भी इसकी फाइल भेज चुका है। शिक्षा निदेशालय हर बार फाइल रिजेक्ट कर देता है। शिक्षा विभाग के अनुसार, नजदीक स्कूल करीब पांच किलोमीटर के दायरे में न हो। नांगल खेड़ी के दायरे में सिवाह और कृष्णपुरा स्थित सीसे स्कूल आते हैं। स्कूल की अपनी जमीन दो एकड़ होनी चाहिए। नौवीं और दसवीं कक्षा में विद्यार्थियों की संख्या 150 होनी चाहिए। नांगल खेड़ी स्कूल अपने स्तर पर सभी शर्तों पर खरा उतरता है, लेकिन साथ लगते सरकारी स्कूलों की दूरी स्कूल को अपग्रेड करने में रोड़ा बन जाती है।
जिले के छह में से दो स्कूल ही हुए अपग्रेड
ग्रामीणों की मांग पर प्रतिनिधियों ने जिले के छह स्कूलों को अपग्रेड करने की घोषणा की थी। इनमें से राजकीय उच्च विद्यालय सिठाना और मांडी ही अपग्रेड हो पाए हैं। ये दोनों स्कूल इसराना विधानसभा क्षेत्र में हैं। नांगल खेड़ी, दीवाना, बाल जाटान और निजामपुर स्थित सरकारी स्कूलों को अपग्रेड कर 12वीं तक बनाने की फाइल शिक्षा विभाग में अटकी हुई है।
अधिकारियों की अनदेखी के चलते बच्चे धूप में तपे
सीडब्ल्यूसी सदस्य किरण मलिक ने बताया कि नांगल खेड़ी स्थित सरकारी स्कूल को अपग्रेड करने का प्रस्ताव छह साल से विचाराधीन है। एक बार मंजूरी मिली थी, लेकिन किसी ने रोड़ा अटका दिया। शनिवार को गांव में शिक्षा अधिकारियों को बुलाया गया था, लेकिन कोई भी अधिकारी नहीं पहुंचा। बच्चे चार घंटे तक धूप में अधिकारियों का इंतजार करते रहे।
नांगल खेड़ी सरकारी स्कूल को अपग्रेड करने की फाइल में भेजी गई थी। विभाग के नॉर्म्स के तहत मामला अटका हुआ है। इसकी फाइल अब मुख्यमंत्री के पास गई है। स्कूल अपग्रेड होने की उम्मीद है। स्कूल की छात्राओं को समझाया जाएगा।
उदय प्रताप सिंह, डीईओ, पानीपत।