हरियाणा के पानीपत में दहेज प्रताड़ना से तंग आकर विवाहिता के आत्महत्या करने के मामले में अदालत ने दोषी पति को आजीवन कठोर कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। मामले की सुनवाई करते हुए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय कुमार वर्मा की अदालत ने सबूतों के अभाव में आरोपी देवर और सास को बरी कर दिया। मामला लुहारी गांव का है।
अतिरिक्त जिला न्यायवादी कुलदीप ढुल के मुताबिक 26 अगस्त 2019 को इसराना थाने की पुलिस को दी शिकायत में राक्सेड़ा गांव निवासी कृष्ण ने बताया था कि उसने अपनी बेटी कविता की शादी लुहारी गांव निवासी मोनू के साथ की थी। शादी में उन्होंने काफी दान-दहेज दिया था। इसके बावजूद पति, सास संतोष, देवर सोनू आदि कविता पर दहेज लाने का दबाव बनाकर मारते पीटते थे।
रक्षाबंधन से दो दिन पहले भी पति ने कविता से 50 हजार रुपये और बाइक लाने की मांग की थी। 26 अगस्त 2019 को उन्हें सूचना मिली कि कविता की हालत गंभीर है। वह लुहारी पहुंचे तो पति, सास, देवर व अन्य ने मिलकर कविता को फांसी देकर मार डाला था। उसे नीचे उतार रखा था। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की थी।
फंदे को कैंची से काटकर छिपाया
अतिरिक्त जिला न्यायवादी ने बताया कि मोनू ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि उसने पत्नी को दहेज के लिए काफी प्रताड़ित किया। उनकी प्रताड़ना से तंग आकर उसने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद उन्होंने सबूत मिटाने के लिए चुन्नी के फंदे को कैंची से काट दिया और कविता के गले से भी चुन्नी को खोल कर छिपा दिया था।
विभिन्न धाराओं में सजा
- आईपीसी की धारा 304 बी के तहत अदालत ने मोनू को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई।
- आईपीसी की धारा 498-ए के तहत तीन साल की सजा और पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया।