पानीपत। जाटल रोड शोंधापुर स्थित बाल अनाथालय से दो दिन पहले दीवार फांदकर दो किशोरियों के फरार होने का मामला अभी शांत नहीं हुआ था कि अब अनाथालय में रहने वाले बच्चों ने भी सुविधा न मिलने की बात कही है। वहीं प्रबंधन ने ग्रांट न मिलना इसका कारण बताया है। दोनों अपनी-अपनी बातों को लेकर मीडिया के सामने आए। प्रधान ने बाल अनाथालय को बंद करने की फिर से बात कही है और अधिकारियों पर कमीशन मांगने के आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी कमीशन के लालच में बाल अनाथालय तक आर्थिक सहायता नहीं पहुंचने देना चाहते। आर्थिक स्थिति बिगड़ने के कारण ही वे बच्चों को बेहतर स्थान पर शिफ्ट करवाना चाहते हैं।
बाल अनाथालय प्रधान अमरजीत नरवाल वीरवार को बाल अनाथालय में मीडिया से रूबरू हुए। प्रधान ने कहा कि बाल अनाथालय चलाने में प्रशासन की तरफ से किसी प्रकार सहयोग नहीं मिल रहा, ना ही बच्चों के पालन-पोषण के लिए ग्रांट आ रही है। डीसीपीओ पैसे की मांग करते हैं। लिखित शिकायत देने पर भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती। ऐसी दशा में बच्चों का पालन-पोषण कर पाना बेहद मुश्किल है। नरवाल का आरोप है कि महिला अधिकारियों ने गलत प्रचार कर संस्था को मिलने वाला दान या चंदा भी बंद करवा दिया है, जिससे उन पर करीब छह लाख का कर्ज हो गया है। आरोप है कि महिला अधिकारी ने वर्ष 2016-17 की अनुदान राशि की फाइल डीसी को गलत व झूठे तथ्य पेश कर रुकवा दी थी, जबकि डीसी ने आज तक एक बार भी बाल अनाथालय का दौरा नहीं किया। आरोप है कि उसे परेशान करने के लिए मंदबुद्धि और घर से फरार लड़कियों को भेजना शुरू कर दिया। प्रशासन की तरफ से उन्हें आज तक कोई सहयोग नहीं मिला। जिन संस्थाओं के पास ना भवन और ना ही रिकॉर्ड है, उनको लाखों रुपये की ग्रांट दिलवाई जा रही है।
आश्रम चलाने को लेना पड़ रहा है कर्ज
नरवाल ने बताया कि बाल अनाथालय आर्थिक तंगी से गुजर रहा है। बच्चों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उन्हें कर्ज लेना पड़ा, कर्मचारियों की सैलरी तक नहीं दे पा रहा। पिछले दो सालों से आर्थिक व मानसिक परेशानी के दौर से गुजर रहा हूं। इस बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया, लेकिन किसी भी अधिकारी ने बच्चों की सुध नहीं ली। इसलिए बच्चों की भलाई के लिए बच्चों को बालगृह राई या फिर किसी अच्छे स्थान पर शिफ्ट करने की मांग की है।
बच्चे बोले सुविधा नहीं मिल रही, लेकिन वे जाना नहीं चाहते
वहीं दूसरी और बाल अनाथालय में रहने वाले बच्चों ने कहीं और जाने से इनकार करते हुए कहा कि वे यहां से कहीं दूसरी जगह नहीं जाना चाहते। प्रशासन को चाहिए कि उन्हें यही पर व्यापक सुविधा मुहैया करवाए। हालांकि बच्चों ने ये भी कहा कि उनको आश्रम में वह सब नहीं मिल रहा, जो उनको मिलना चाहिए था।
ग्रांट में मांग रहे थे दस प्रतिशत कमीशन
नरवाल ने बताया कि नवंबर 2015 में 11 लाख रुपये की अनुदान राशि मिली थी, जो बच्चों से संबंधित कार्यों में ही खर्च हो गई। इसको लेकर डीसीपीओ ने विवाद खड़ा कर दिया और राशि में से दस प्रतिशत कमीशन मांगा। इसकी शिकायत प्रधानमंत्री, महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक व पानीपत डीसी को दी थी, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि दो फरवरी 2017 को हुई जांच के बाद जिले में रजिस्ट्रेशन को ही सही पाया गया था। बावजूद इसके उन्हें कोई आर्थिक सहायता नहीं दी गई। रिसालू रोड पर एक ओपन शेल्टर होम मिला था, जो फर्जी रजिस्ट्रेशन पर चलता पाया गया है। संबंधित लोगों को जेजे एक्ट के तहत ग्रांट दिलवाई गई। सेक्टर-छह में चल रहे बाल अनाथालय में एक भी बच्चा नहीं है, फिर भी वहां ग्रांट दिलवाई जा रही हैं, जबकि उनके पास 40 बच्चे हैं, फिर भी ग्रांट नहीं दी जा रही। संस्थाओं द्वारा दिए जाने वाले चंदे को भी अधिकारियों ने बंद करवा दिया। डीसी के समक्ष गलत रिपोर्ट पेश की गई। यही कारण है कि संस्था कर्जदार होकर आर्थिक तंगी के चलते अनाथालय को बंद करवाने की मांग की है।
वर्जन
अमरजीत नरवाल द्वारा इस प्रकार के आरोप पहले भी लगाए जा चुके हैं। प्रशासनिक अधिकारियों ने आरोपों की जांच के बाद क्लीन चिट दे दी थी। कमीशन मांगने के आरोप गलत हैं।
सुमन सूद, अध्यक्ष, सीडब्ल्यूसी, पानीपत।