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कई राज्यों से किशोरियों को लाकर उन्हें वेश्यावृति में धकेल रहे दिल्ली के माफिया

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पानीपत। पानीपत में झारखंड, बिहार, असम, बंगाल, उड़ीसा और नेपाल से नाबालिग लड़कियों को लाकर पानीपत में बेचा जाता है। शहर के सेक्टरों और मॉडल टाउन जैसे वीआईपी कॉलोनियों की कोठियों में 300 से ज्यादा नाबालिग लड़कियां नौकरानी हैं। यही नहीं, ऐसी लड़कियों से वेश्यावृत्ति कराई जाती है और उनकी जबरन दोगुने उम्र के लोगों से शादी भी कराई जाती है। लड़कियों को विभिन्न राज्यों से दिल्ली में लाकर प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए बेचा जाता है। इसके बाद इन्हें देह व्यापार के धंधे में धकेल दिया जाता है।
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बता दें कि बाल कल्याण समिति के पदाधिकारी, पुलिस अफसर और प्रशासन के सामने इस तरह के कई मामले सामने चुके हैं। जिनमें लड़कियां कोठियों से भागकर अनाथालय पहुंची। उन केसों में भी पुलिस ने तो ठीक से जांच की और ही बाल कल्याण समिति ने उन्हें परिजनों तक पहुंचाने के लिए कोई प्रयास किए। जिला प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग, श्रम विभाग, बाल संरक्षण कमेटी, जिला बाल कल्याण समिति और पुलिस व्यापारिक प्रतिष्ठानों व ईंट भट्ठों में संयुक्त अभियान चलाकर बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराने में नाकाम हैं।
पिछले दो साल में ये केस आए सामने:
केस नंबर 1.
सौंदापुर में 15 वर्षीय एक किशोरी एक साल से रह रही थी। कभी उसको घर भेजने के प्रयास नहीं हुए। सीजेएम 18 मई को अनाथालय गए तो उसने अपने परिजनों के बारे में जानकारी दी। सीजेएम ने उसके पिता को तलाशा और पानीपत बुलाकर 19 मई को किशोरी को उनके सुपुर्द कर दिया।
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केस नंबर 2
झारखंड केगुमला जिले की 17 वर्षीय किशोरी को दिल्ली में बेचा गया। प्लेसमेंट एजेंसी ने उसे पानीपत के काकू बसंल को बेच दिया। 3 माह तक रहने के बाद किशोरी खुद ही घर से भागकर पुलिस के पास पहुंच गई थी। पुलिस ने 25 जून को उसे अनाथालय भेज दिया। 5 जुलाई को सीजेएम बाल अनाथालय गए। किशोरी ने आरोप लगाया था कि बंधक बनाकर उससे घर का सारा काम कराया जाता था। सीजेएम की दखल पर आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज हुआ। सीजेएम ने ही उसके परिजन को तलाशा और पिता को बुलाकर किशोरी को उनके हवाले किया।
केस 3
असम की एक नाबालिग लड़की को दिल्ली में बेचा गया। जितेंद्र वर्मा व आरती उसको 15 हजार रुपए में 4 दिन के लिए खरीदकर पानीपत लाए। उन्होंने यहां लड़की को वैश्यावृत्ति में धकेल दिया। लड़की चोरी छिपे बस स्टैंड पर पहुंची और पुलिस को इस बारे में बताया तब मामले का खुलासा हुआ।
केस 4
सौंदापुर बाल अनाथालय में 11 वर्षीय एक बच्ची चार माह से रह रही थी। 16 मार्च को सीजेएम अनाथालय गए। बच्ची को कार्यालय बुलाकर बातचीत करके उसके परिजनों को तलाश दिया। मां लुधियाना में मिल गई। 20 मार्च को मां को पानीपत बुलाकर बच्ची को सौंपा गया।
केेस 5
भगत नगर से एक नाबालिग लड़की बरामद की गई। लड़की को बाग्लादेश से नौकरी देने का झांसा देकर पानीपत लाया गया था। किशोरी के साथ पानीपत में कई लोगों ने दुष्कर्म किया और उसे 4 हजार में बेच दिया गया। किशोरी ने भागकर पड़ोस में जाकर आपबीती सुनाई। इसके बाद पुलिस को इसकी सूचना दी गई। पुलिस ने किशोरी के बयान दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।
इस तरह होता है काम : एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह कारोबार दिल्ली से शुरू होता है। प्लेसमेंट एजेंसियां चलाने वालों ने दिल्ली के सकरपुर, लक्ष्मीनगर, भजनपुरा, विकासपुरी, उत्तम नगर, संगम विहार, कुसुमपुर पहाड़ी, प्रीतमपुरा, कंजावला व नरेला जैसे रिहायशी इलाकों बस्तियों में किराये के कमरे लिए हुए हैं। पानीपत इस काम की पहली पंसद है। कारण यह है कि पानीपत शहर दिल्ली के काफी नजदीक है और यह औद्योगिक नगर है। यहां बड़े-बड़े उद्योगपति रहते हैं, जिनकी यहां बड़ी-बड़ी कोठियां हैं। जिनमें काम करने के लिए लड़कियों की जरूरत होती हैं।
बड़े-बड़े ख्वाब दिखाकर एजेंसी को सौंपा जाता है : दिल्ली में कई प्लेसमेंट एजेंसियां हैं, जिनके एजेंट कई जगह हैं। किशोरियों को बडे़-बड़े ख्वाब दिखाकर दिल्ली की प्लेसमेंट एजेंसी के सुपुर्द किया जाता है। बेचने वाले वहां से एक बार में पैसे वसूल लेते हैं। एजेंसी इन्हें एक वर्ष के लिए घरों में काम करने के लिए छोड़ देते हैं। इसके बदले इस अवधि के औसतन 40 हजार रुपये तक लिए जाते हैं।
50 हजार की तस्करी : डेढ़ साल पहले अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी), झारखंड की एक रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड से हर साल औसतन 30 हजार लड़कियां दूसरे राज्यों के महानगरों में भेजी जाती हैं। 10 हजार अकेले हरियाणा में ही ऐसी लड़कियों के होने का अनुमान हैं। पानीपत में भी इसकी काफी डिमांड है। कुछ प्लेसमेंट एजेंसी नेटवर्क दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड, राजस्थान, महाराष्ट्र तक फैला है, जो इन सब तरह के स्थानों से हर वर्ष औसतन 50 हजार नाबालिग की तस्करी कर रहे हैं।
बाल कल्याण समिति इस तरह के बच्चों को खोजने के प्रयास करती है और जो बच्चे मिलते हैं उन्हें तुरंत बाल अनाथालय भेज कर आगे की कार्यवाही करते हैं। लेकिन लोगों की तरफ से ज्यादा सूचनाएं नहीं मिलतीं, जिसके कारण इस तरह के लोगों का कम पता चल पाता है।
-किरण मलिक, अध्यक्ष जिला बाल कल्याण समिति।

कई बार ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। प्रवासी लड़कियों के साथ दुष्कर्म और अन्याय हुए हैं। पुलिस इन मामलों को गंभीरता से ले रही है। विभिन्न जगहों पर दंबिश भी दी जा रही है। मेरी कोशिश है कि गिरोह के माफिया तक पहुंचा जा सके। मेरी लोगों से अपील है कि वो ऐसी सूचनाएं पुलिस तक पहुंचाए।
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-सतीश वत्स, डीएसपी हेडक्वार्टर पानीपत।
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