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ट्रेनों पर पत्थर फेंक रहे चार नाबालिगों को आरपीएफ ने पकड़ा, अभिभावकों से काऊंसलिंग करा चेतावनी दे छोड़ा

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ट्रेनों पर पत्थर फेंक रहे चार नाबालिगों को आरपीएफ ने पकड़ा, अभिभावकों से काउंसिलिंग करा चेतावनी दे छोड़ा
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अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। ट्रेनों पर पत्थर फेंकने के मामले में आरपीएफ की टीम ने चार नाबालिगों को मौके से पकड़ा। हालांकि बाद में आरपीएफ ने नाबालिगों के परिजनों को थाने बुलाकर काऊंसलिंग करवाई जिसके बाद नाबालिगों को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया।
आरपीएफ के अनुसार उन्हें सूचना मिली थी कि विकास नगर के पास 4 लड़के रेलवे लाइन के पास खड़े होकर आने-जाने वाली ट्रेनों पर पत्थर फेंक रहे हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए आरपीएफ की टीम तुरंत हरकत में आई और मौके पर पहुंचकर चारों नाबालिग लड़कों को पकड़कर थाने ले आई तथा आवश्यक पूछताछ की। आरपीएफ ने नाबालिगों के अभिभावकों को थाने बुलाया और पकड़े गए लड़कों के साथ काऊंसलिंग करवाते हुए उन्हें चेतावनी देते हुए छोड़ दिया। आरपीएफ अधिकारियों का कहना है कि आरपीएफ द्वारा नाबालिगों व अभिभावकों को जागरूक करने के लिए एक अभियान भी चलाया हुआ है जिसमें नाबालिग बच्चों के अभिभावकों को काऊंसलिंग करके उन्हें ऐसी घटनाओं में होने वाले नुकसानों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। पकड़े गए नाबालिग बच्चों ने भी हालांकि ट्रेन पर पत्थर फेंककर कानून अपने हाथ में लेने की कोशिश की लेकिन उनकी बचकाना हरकत को देखते हुए उनके अभिभावकों के समक्ष उन्हें चेतावनी देकर छोड़ दिया गया।
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दसवीं कक्षा में पढ़ते हैं चार में से तीन नाबालिग
ट्रेन पर पत्थर फेंकने के मामले में आरपीएफ द्वारा पकड़े गए चारों नाबालिगों में से 3 नाबालिग राजकीय स्कूल तहसील कैंप के 10वीं कक्षा के छात्र हैं। छात्रों ने बताया कि वे स्कूल पहुंचने में लेट हो गए थे। एक छात्र ने बताया कि स्कूल जाने में देरी होने पर वह अपने दो सहपाठियों सहित विकास नगर में अपने ममेरे भाई के पास गया था। जहां से वे रेलवे लाइनों के पास चले गए थे। छात्रों का कहना है कि उन्होंने ट्रेन पर पत्थर नहीं फेंके, बल्कि रेलवे लाइन के पास खेल रहे थे।
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नाबालिगों की हरकत पर ध्यान नहीं दे रहे अभिभावक : धीमान
कुछ अभिभावक अपने नाबालिग बच्चों की हरकतों पर ध्यान नहीं दे रहे। परिणामस्वरूप कई बार नाबालिग बच्चे ऐसी हरकत कर बैठते हैं जिसका बाद में पछतावा होता है। वे बच्चों को स्कूल भेजने तक की इतिश्री कर लेते हैं जबकि अभिभावकों को अपने बच्चों के व्यवहार का पता होता है। हालांकि कुछ जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन की भी होती है। बच्चे के स्कूल न आने पर अभिभावकों से कंफर्म जरूर कर लेना चाहिए।
कुसुम धीमान, समाजसेविका।
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