पानीपत। बिहार में चमकी यानि दिमागी बुखार से लगातार हुई बच्चों की मौत के हादसे को सोशल मीडिया ने लीची को जिम्मेदार ठहरा दिया है। सोशल मीडिया पर लगातार फैल रही अफवाहों के कारण लीची का व्यापार बिल्कुल ठप सा हो गया है। व्हाट्सएप और फेसबुक पर अफवाह फैल रही है कि लीची के अंदर एक कीड़ा पाया जा रहा है, जो बच्चों के लिए खतरनाक है। इससे विशेष रूप से कम उम्र के बच्चे चमकी बुखार का शिकार हो रहे हैं। नतीजा यह हुआ कि पानीपत की मशहूर लीची को लोगों ने खरीदना ही बंद कर दिया। इससे लीची उगाने वाले किसानों के साथ थोक विक्रेता और रेहड़ी और फड़ी वालों के लिए परेशानी खड़ी हो चुकी है। व्यापार 90 प्रतिशत गिर चुका है। जहां लीची के रेट 130 रुपये प्रति किलो हो चुके थे, अब इन्हें कोई 70 रुपये प्रति किलो खरीदने को भी तैयार नहीं है। दुकानों पर खरीदी जा चुकी लीची खराब हो रही है। इस बारे में जब विशेषज्ञों से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि चमकी यानि दिमागी बुखार का लीची से कोई संबंध नहीं है। यह बुखार डि-हाइड्रेशन की वजह से होता है। उन्होंने लीची की वजह से होने वाले इस बुखार को पूरी तरह से अफवाह ठहराया है।
कीड़े होने की फैली अफवाह
अफवाह थी कि लीची के अंदर एक कीड़ा होता है। इससे कम उम्र के बच्चे ज्यादा प्रभावित होते हैं। इसे खाने से वे चमकी बुखार की गिरफ्त में आ सकते हैं। कई लोगों ने यहां की लीची को बिहार में हुई घटना से भी जोड़ा है।
यमुना तलहटी लीची का खुमार बंद
यमुना की तलहटी से निकलने वाली लीची की मार्केट वैल्यू सबसे ज्यादा रहती है। इसकी कीमत बाकी जगह से आने वाले लीची से ज्यादा होती थी। इस घटना के बाद यहां की लीची बिकनी बंद हो चुकी है। पहाड़ों से आने वाली लीची को भी कोई खरीदने को तैयार नहीं है।
चमकी बुखार के बाद से कारोबार ठप
सनौली के लीची बाग मालिक कृष्ण त्यागी ने बताया कि सबसे लीची से चमकी बुखार होने की अफवाह उड़ी है, तब से कारोबार ठप है। बाग से 100 रुपये में उठने वाली लीची के दाम गिरकर बीते 15 दिन में 60 रुपये तक आ गए हैं। बाग मालिक सुधीर त्यागी ने बताया कि बाजार में लीची की बिक्री न हो पाने की वजह से लीची दुकानों पर ही पड़ी-पड़ी खराब हो रही है। वहीं इसे उगाने वाले किसान भी अब परेशान हो चुके हैं। उनसे थोक विक्रेता लीची खरीदने को तैयार ही नहीं है। जो लीची यमुना तलहटी के नाम से ही बिकना शुरू हुआ करती थी, वह लीची अफवाह की वजह से खराब होना शुरू हो चुकी है। उधर, सिविल अस्पताल, पानीपत की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. निहारिका ने कहा कि चमकी यानी दिमागी बुखार लीची से नहीं होता। यह एक अफवाह है। यह बुखार डि-हाइड्रेशन की वजह से होता है। इसकी चपेट में सबसे ज्यादा वो बच्चे आते हैं, जिनका औसतन वजन कम होता है।