पानीपत। नगर निगम के ताऊ देवी लाल कॉम्पलेक्स में मंगलवार दोपहर 12 बजे उस समय हंगामा मच गया जब वार्ड नंबर 26 के पार्षद विजय जैन शहर के कई लोगों को साथ लेकर क्षेत्रीय कराधान अधिकारी से मिलने पहुंचे। मामला प्रॉपर्टी आईडी में भ्रष्टचार से जुड़ा था। जैन ने अधिकारी से पूछा कि वे शहर के साधारण लोगों की प्रॉपर्टी आईडी क्यों नहीं बना रहे हैं ? जबकि दलालों के कामों उंगलियों पर होते हैं। निगम के भ्रष्टाचारी अफसर गरीब लोगों को खून चूसने पर लगे हैं। जो बर्दाश्त नहीं होगा। पार्षद ने अपने फोन में भ्रष्टाचार के सबूत दिखाते हुए अफसरों पर जमकर भ्रष्टाचार के आरोप जड़े। उनके साथ आए लोगों ने अफसरों के सामने दलालों और भ्रष्टाचार में संलिप्त कर्मचारियों को पिटारा खोल दिया।
इस पर श्रेत्रीय कराधान अधिकारी भी तैश में आ गए और विजय जैन को बाहर जाने के लिए बोल दिया। जिस पर पार्षद आवेशित हो गए और अफसर को खूब सुनाई। हैरानी की बात ये है कि जिस समय निगम में हंगामा हो रहा था, उसी समय निगम आयुक्त के कार्यालय में आयुक्त के साथ मेयर भी मौजूद थे लेकिन एक बार भी लोगों की फरियाद सुनने बाहर नहीं आए। जिसके बाद पार्षद को ही अपनी फरियाद लेकर अंदर जाना पड़ा।
पार्षद विजय जैन और उनके साथ पहुंचे लोगों ने कहा कि जब वे निगम में काम करवाने जाते हैं तो महीनों चक्कर कटवाने के बाद भी खाली हाथ लौटाया जाता है। दलालों को चाय पिलाई जाती है। निगम कर्मचारियों ने दलालों के लिए कोड भी बनाए हैं। अगर अफसर कहेगा कि ये हमारा आदमी है तो वह दलाल है और उसका काम कर दिया जाएगा। अगर आम आदमी होगा तो बोला जाएगा कि ये हमारा आदमी नहीं है और उसका काम नहीं होगा।
पार्षद विजय जैन ने फोन में सबूत दिखाते हुए कहा कि इन अफसरों ने कई एरिया में बिना अनुमति के सब डिविजन कर प्रॉपर्टी आईडी तक बना दी। अवैध एरिया को वैध तक बना दिया। इस पर श्रेत्रीय कराधान अधिकारी ने कहा कि जो प्रॉपर्टी आईडी बनी हैं वे अगर गलत हैं तो वे उनको रद्द कर सकते हैं। इस पर पार्षद ने कहा कि उनकी तो रजिस्टरी तक हो चुकी है। इस पर अफसर ने कहा कि वे उन्होंने नहीं बनाई। पार्षद ने कहा कि वे उनके आने के बाद ही बनी हैं।
वर्जन-
डीलर लेकर आए थे जैन : क्षेत्रीय कराधान अधिकारी
विजय जैन का ये प्री-प्लान था। वे चार डीलरों को लेकर आए थे। उनमें एक वार्ड नंबर दो का भी डीलर था। उनका मेरे काम से लेना देना तक नहीं था। जो प्रॉपर्टी आईडी बनाई गई हैं वे उनके कार्यकाल में नहीं बनी। अगर गलत हैं तो उनको रद्द भी किया जाएगा। ऐसे दबाव में गलत काम नहीं किया जाएगा।
- समयपाल सिंह, श्रेत्रीय कराधान अधिकारी।