पानीपत। एक बार फिर 21 साल बाद नगर निगम ने डेयरियों को शहर से बाहर शिफ्ट करने और गोबर प्रबंधन नीति को लागू करने की योजना बनानी शुरू की है। इसके लिए निगम आयुक्त ने अधिकारियों से बिंझौल में डेयरियों के लिए आवंटित किए गए प्लाॅटों, शहरी में डेयरियों की संख्या और गोबर प्रबंधन नीति के ब्योरा मांगा है। इसके अलावा शहर में मौजूदा डेयरियों की स्थिति की ग्रांउड रिपोर्ट कर सर्वे करने को कहा है।
आयुक्त जयेंद्र सिंह छिल्लर का कहना है कि वे इस प्रोजेक्ट पर काम भी शुरू करेंगे और इसे पूरा भी करेंगे। गौरतलब है कि शहर में इस समय करीब 500 डेयरियां चल रही हैं। जबकि 21 साल पहले 2003 में डेयरियों को शहर से बाहर शिफ्ट करने के लिए डेयरी संचालकों को 147 प्लॉट आवंटित किए गए थे। इनमें से 56 पर डेयरियां शिफ्ट हो गई थी लेकिन इनमें से 55 प्लॉटों में गड़बड़झाला मिला था। जुलाई मध्य में भी डीसी वीरेंद्र दहिया ने 15 दिन में डेयरियों को शहर से बाहर शिफ्ट करने का अल्टीमेटम भी दिया था। जिसमें निगम अधिकारियों को चेतावनी भी दी गई थी लेकिन डीसी का अल्टीमेटम भी पूरा नहीं हो सका।
निगम के रिकॉर्ड अनुसार 2003 में सर्वे में शहर में 197 डेयरियां मिली। 2020 में शहर का सर्वे कराया तो 381 डेयरियां मिली। अब डेयरियों की संख्या ज्यादा हो सकती है। इसके लिए निगम की ओर से फिर से सर्वे कराएगा। निगम ने 21 साल पहले बिंझौल गांव में जमीन खरीद कर 147 प्लॉट आवंटित किए थे। इनमें डेयरियों की शिफ्टिंग की बजाए अवैध कब्जे हो चुके हैं। जिन लोगों को डेयरियों के नाम पर प्लॉट दिए गए थे उनमें से अधिकतर आज भी खाली पड़े हैं, वहां या तो मकान बने हैं या दूसरी गतिविधियां चल रही हैं।
वहीं, आयुक्त ने अधिकारियों से गोबर प्रबंधन नीति का भी पूरा ब्योरा लिया है। जिसमें निगम शहर में संचालित डेयरियों से गोबर उठवाने और उसके निस्तारण का काम करेगा। नगर निगम आयुक्त जयेंद्र सिंह छिल्लर ने बताया कि वे इस प्रोजेक्ट को पूरा करेंगे। इसके लिए अधिकारियों से संबंधित रिकॉर्ड की जानकारी ली जा रही है। वहीं, हर संभव विकल्प की तलाश करने के बाद इस प्रोजेक्ट को पूरा किया जाएगा।