पानीपत। नगर निगम में अब नई पुरानी प्रॉपर्टी आईडी तो बननी बंद हो ही चुकी थी, जिन्होंने पहले आवेदन किए थे, उनको भी रिजेक्ट किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि रिजेक्ट की जा रहीं फाइलों का कोई ठोस कारण भी नहीं दिया जा रहा। बस पोर्टल पर सभी फाइलों में एक ही मैसेज डाल दिया जाता है कि यह फाइल हाउस टैक्स रिपोर्ट के कारण रिजेक्ट कर दी गई है। जबकि सभी आवेदनों में यह रिपोर्ट संलग्न है। वहीं, निगम के पास भी संपत्तियों के टैक्स का पूरा रिकार्ड है। बताया जा रहा है निगम अफसरों ने अब तक दो हजार से भी ज्यादा आवेदन रिजेक्ट कर दिए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि अभी नई और पुुरानी फाइलों वाली प्रॉपर्टी आईडी बनाने का काम रोका गया है। याशी का सर्वे लागू होने के बाद इनको बनाया जाएगा। अभी निगम सिर्फ पेंडिंग फाइलों के निपटान पर ही लगा है। हालांकि कुछ अधिकारियों ने दबी जुुबान यह बताया कि वे निगम की बिगड़ती छवि को बचाने के लिए ऐसा कर रहे हैं।
शहरवासियों का आरोप है कि निगम अधिकारी केवल सिफारिशों वाली फाइलों को ही बना रहे हैं। पिक एंड चूज की नीति अपनाई है। जिन पर नेताओं का दबाव होता है, केवल उनकी ओर से भेजी गई फाइलें ही पास होती हैं। जब से नए अफसरों ने नई पुरानी आईडी बनाने का काम बंद किया है तब से अब तक 50 से भी ज्यादा सिफारिशी फाइलों को तैयार किया जा चुका है। कुछ तो अपनी प्रॉपर्टी आईडी और एनडीसी लेकर रजिस्टरियां तक करवा चुके हैं।
शहर से संतोष, जगदीश, अनीता देवी ने बताया कि उन्होंने निगम में अपनी आईडी के लिए ऑब्जेक्शन लगाया था। अधिकारी बार बार इनको रिजेक्ट कर रहे हैं। कार्यालय जाओ तो जवाब मिलता है कि नया सर्वे लागू होने के बाद ही काम होगा। ऑब्जेक्शन रिजेक्ट होने का कारण भी स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। उन्होंने बताया कि समय सीमा को देखते हुए निगम के तत्काल समाधान का विकल्प चुना गया, लेकिन यह विकल्प अब तक चालू नहीं हो सका है।
तहसील कार्यालय के टोकन तक जा रहे बेकार
जिन लोगों ने अपनी संपत्तियों की खरीद फरोख्त को लेकर तहसील कार्यालय से टोकन लिए हैं, उनके टोकन अब व्यर्थ जा रहे हैं। किसी ने स्टॉप पेपर खरीद कर रजिस्टरियों की तैयारी की है तो कोई बैंक से लोन लेने के इंतजार में प्रॉपर्टी आईडी बनवा रहा है, लेकिन अधिकारियों की लेटलतीफी से सबको परेशानी हो रही है।
वर्जन-
जब तक याशी नहीं, तब तक आईडी नहीं
याशी का सर्वे अभी लागू नहीं हुआ है। अभी केवल पेंडिंग फाइलों को निपटाया जा रहा है। सर्वे लागू होने के बाद ही नई आईडी बनाई जाएगी।
- समयपाल सिंह, जेडटीओ, नगर निगम।