पानीपत। सहकारिता विभाग में एकीकृत सहकारी विकास परियोजना (आईसीडीपी) में करोड़ों के घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की जांच आखिरकार रिकॉर्ड मांगने पर आकर थम गई। दरअसल, एसीबी के बार-बार रिकॉर्ड मांगने के बाद भी सहकारी समितियां के अधिकारी उपलब्ध नहीं करा रहे हैं।
विदित हो कि जिले में 32 पैक्स और 10 क्रेडिट सोसायटी हैं। यहां 2022 से 23 में आईसीडीपी योजना में करोड़ों का सामान भेजा गया था। यह सामान एआर डॉ. राजकुमार और अंजू कौशिश के कार्यकाल में खरीदा गया था। एंटी करप्शन ब्यूरो ने डॉ. राजकुमार को पानीपत में फर्जीवाड़े में गिरफ्तार किया था। उनसे पूछताछ भी की थी। इसके बाद संबंधित अधिकारियों के कार्यकाल का रिकॉर्ड मांगा गया था, लेकिन यह सारा रिकॉर्ड खुर्द-बुर्द मिला था। इसके बाद एक सप्ताह में रिकॉर्ड नए सिरे से तैयार कर देने का भरोसा दिया गया था, लेकिन आठ दिन बाद भी अब तक रिकॉर्ड नहीं बन पाया है।
फर्जी डिमांड लेटर बनाकर भेजा सामान
आईसीडीपी योजना में एक और फर्जीवाड़ा सामने आया है। कई पैक्स और सीएस में प्रबंधकों के नाम से फर्जी डिमांड लेटर बनाया गया। इसी के आधार पर सामान भेजा गया। आरोप है कि इसमें भी पूरा सामान नहीं पहुंचाया गया। प्रबंधकों के सामने अब सामान पूरा दिखाना मुश्किल हो रहा है।
वर्जन :
आईसीडीपी योजना में खरीदे गए सामान का रिकॉर्ड बनाया जा रहा है। सभी प्रबंधकों को बैंक खातों के साथ पैक्स के सामान से मिलान करने के आदेश दिए गए हैं। रिकॉर्ड जल्द ही उपलब्ध कराया जाएगा। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जा रही।
- त्रिलोचन सिंह, एआर, सहकारी समितियां।