पानीपत। शिवम इंटरनेशनल की दो खेप विदेश में अटक गई, अज्ञात कारण से वह मालिक को नहीं मिल पाई। मालिक ने बीमा कंपनी से क्लेम मांगा तो उन्होंने देने से इंकार कर दिया। जिसके बाद मालिक ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया और इंसाफ मांगा। जिस पर अब जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के चेयरमैन जेआर चौहान ने फैसला सुनाते हुए कंपनी को 15 लाख रुपये नौ प्रतिशत ब्याज दर से देने के आदेश दिए है। वहीं पीड़ित को मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना देने पर कंपनी को 30 हजार रुपये मुआवजे के रूप में देने के आदेश दिए है। मुकदमे बाजी में लगे 5500 रुपये भी कंपनी ही देगी।
सेक्टर 25 स्थित शिवम इंटरनेशनल के प्रोपराइटर सुनील कुमार ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ शिकायत देते हुए बताया कि वह पिछले कई वर्ष से इस कंपनी से अपने माल का इंश्योरेंस कराता आ रहा है। उसने वर्ष 2016 में अपनी दो खेप का इंश्योरेंस लिया था। जिनमें एक खेप में 690 डिब्बों में 100 प्रतिशत सूती हाथ से बुना हुआ कपड़ा था। वहीं दूसरी खेप में 890 बाथमैट( जिसमें कॉटन रग्स, कॉटन बाथमैट, पॉलीस्टर, सी-कवर, बेड स्प्रेड आदि) शामिल है। दोनों खेप पानीपत से यूके भेजी गई थी। दोनों खेप अलग-अलग कंटेनर में डलवाई गई थी। 690 कार्टन वाली खेप का बीमा 7,25,528 और दूसरी खेप का 27,50,355 रुपये का बीमा कराया था। उन्होंने खेप कंसाइनमेंट ऑफ इंडिया के माध्यम सेइसे बाबरपुर आंतरिक कंटेनर डिपो में निर्यात के लिए सौंप दिया गया था। सीसीआई द्वारा कंटेनरों को नई दिल्ली के रास्ते मुंद्रा ले जाया गया। मुंद्रा में कंटेनरों को सीसीएनआई अराउको जहाज पर लोड किया गया था। जो एक सितंबर 2016 को दोपहर के समय जहाज रास्ते में दुर्घनाग्रस्त हो गया, जहां में आग लग गई थी। जिसकी सूचना उसे आठ सितंबर 2016 को मिली। हालांकि बाद में पता चला कि उसके कंटेनर सेफ है, लेकिन उसे कुछ दस्तावेज जमा कराने होंगे, उसने वह जमा भी कराए, लेकिन इसके बावजूद कंटेनर नहीं छोड़े गए। जिसके बाद उसने बीमा कंपनी से संपर्क किया और अपने नुकसान की भरपाई के लिए 15 लाख 614 रुपये मांगे, लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया।