पानीपत। शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स लगातार सातवें दिन यलो जोन में रहा। पिछले सात दिन से एक्यूआई ऊपर नीचे हो रहा है। शुक्रवार को बृहस्पतिवार के मुकाबले एक्यूआई 31 अंक गिरा है। शुक्रवार को एक्यूआई 167 दर्ज किया गया है।
ये स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। सुबह शाम पड़ने वाली स्मॉग से दमा रोगियों की परेशानी बढ़ रही है। खांसी के रोगी बढ़ रहे हैं। सुबह की दृश्यता भी कम हो रही है। शुक्रवार को पीएम- 10 की अधिकतम मात्रा 160 दर्ज की गई है। पीएम- 2.5 की अधिकतम मात्रा 175 दर्ज गई है। हवा में अब धूल व धुएं की मात्रा स्थिर बनी हुई है। पर्यावरण मामलों के विशेषज्ञाें के अनुसार हवा चलने से एक्यूआई स्थिर बना हुआ है। अब तापमान जल्द गिरा और हवा का दबाव बढ़ा तो एक्यूआई दोबारा बढ़ सकता है। प्रशासन को ग्रैप-4 के तहत सख्ती से काम करना होगा।
प्रशासन की लापरवाही से खराब हो रही आबोहवा-
प्रशासन की लापरवाही से शहर की आबोहवा खराब हो रही है। ग्रैप-4 के नियमों का सख्ती से पालन नहीं रहा है। हवा में धूल के कणों की मात्रा तेजी से बढ़ रही है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों पर नगर निगम को शहर की सड़कों व पेड़ पौधों पर, एनएचएआई को नेशनल हाईवे पर व पीडब्ल्यूडी को स्टेट हाईवे पर पानी का छिड़काव करना था लेकिन यहां काम शुरू नहीं किया गया। इसलिए हवा में पीएम 2.5 की मात्रा लगातार बढ़ी है। उद्योगों से निकलने वाले धुएं व वाहनों के कारण पीएम-10 की मात्रा भी लगातार बढ़ रही है।
शहर की हवा का हाल-
हवा में अब तक 2.5 की मात्रा न्यनूतम 162, औसत 168 और अधिकतम 175 दर्ज की गई है। पीएम-10 की मात्रा न्यूनतम 149, औसत 154 और अधिकतम 160 दर्ज की गई है। नाईट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा न्यूनतम 29, औसत 30 व अधिकतम 32 दर्ज की गई है। अमोनिया की मात्रा न्यनूतम दो व औसत व अधिकतम तीन दर्ज की गई है। हवा में कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा न्यनूतम 24, औसत 25 व अधिकतम 28 दर्ज की गई। सल्फर डाईऑक्साइड की मात्रा न्यनूतम 12 व अधिकतम 13 दर्ज की गई है। जहरीली हुई आबोहवा से दमा, चमड़ी व ह्दय के रोगी बढ़ रहे हैं। सुबह शाम आंखों में जलन महसूस हो रही है। दमा रोगियों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है।
प्रशासन को बरतनी होगी सख्ती : डाॅ.राजेंद्र
पर्यावरण मामलों के विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि अब एक्यूआई दोबारा बढ़ रहा है। एक्यूआई 167 दर्ज किया गया है। प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए। तापमान में गिरावट के साथ एक्यूआई बढ़ेगा। प्रशासन को पर्यावरण पर सख्ती से काम करना चाहिए। इसलिए प्रदूषण के कारकों का निरीक्षण होना जरूरी है। आने वाले दिनों में भी एक्यूआई के कम होने की उम्मीद है।