पानीपत। टेक्सटाइल नगरी का पानी पीने योग्य नहीं है। लोग दूषित पानी पीने से बीमार हो रहे हैं। सबसे अधिक प्रदूषित पानी सेक्टर 29, सेक्टर 29, बबैल रोड व काबड़ी रोड का है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांचा गया हर तीसरा सैंपल फेल मिला है। जन स्वास्थ्य विभाग को इस गंभीर विषय को लेकर सिविल सर्जन की ओर से पत्र भी लिखा गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने एक जनवरी से 31 मई तक जिले में 13993 जगहों से पानी का ऑर्थोटोलॉडीन टेस्ट हुआ है। इनमें से 3915 जगह पीने के पानी के सैंपल फेल हो गए। शहर के 604 क्षेत्रों में पीने योग्य पानी नहीं मिला है। जबकि ग्रामीण क्षेत्र में 3311 जगहों से लिए गए पानी की रिपोर्ट नेगेटिव मिली है। प्रदूषित पानी पीने से लोग डायरिया जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। जिला नागरिक अस्पताल में हर रोज डायरिया के 50 से अधिक नए मरीज पहुंच रहे हैं।
मई में औद्योगिक क्षेत्र पर स्वास्थ्य विभाग ने अधिक फोकस किया। मई में स्वास्थ्य विभाग ने फ्लौरा चौक, बबैल रोड, भक्त नगर, सनौली रोड, ईएसआई व जन सेवा दल के कार्यालय में लगे कूलर से पानी का बैक्ट्रीरियोलॉजिक टेस्ट किया। यहां से स्वास्थ्य विभाग ने 22 सैंपल लिए थे। इनमें से 11 सैंपल फेल गए । ईएसआई अस्पताल से लिया गया सैंपल भी फेल हो गया। पांच माह में जिले भर से किए 125 बैक्ट्रीरियल टेस्ट में से 38 की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। पानी में बैक्ट्रीरियल ग्रोथ बढ़ रही है।
माह- लिए गए सैंपल- सैंपल पास- सैंपल फेल शहरी क्षेत्र में फेल
जनवरी- 2450 1730 720 151
फरवरी- 2250 1901 654 116
मार्च- 2191 583 608 107
अप्रैल- 3152 2294 858 118
मई- 3945 2870 1075 112
कुल- 13993 9678 3915 604
प्रदूषित पानी से बाहरी क्षेत्रों में बढ़ा डायरिया का खतरा-
शहरी की बाहरी कॉलोनी बतरा कॉलोनी, गोपाल कॉलोनी, विद्यानंद कॉलोनी, बलजीत नगर, भारत नगर, अर्जुन नगर, कुलदीप नगर, नूरवाला क्षेत्र की कॉलोनियां, राज नगर समेत कई कॉलोनियों में डायरिया का खतरा एकाएक बढ़ा है। अस्पतालों में आने वाले डायरिया के केस इन्हीं कॉलोनियों से हैं। इनमें बच्चों की संख्या अधिक है। डायरिया मुख्यत: प्रदूषित पानी पीने से ही फैलता है।
बॉक्स
100-200 के बीच होना चाहिए पानी का टीडीएस
पानी में घुली चीजों को टीडीएस यानि कुल विघटित ठोस कहते हैं। इसमें सॉल्ट, कैशिल्यम, मैग्निशियम, पोटेशियम, सोडियम, कार्बाेनेट क्लोराइड है। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड के मुताबिक मानव शरीर अधिकतम 300 पार्टस प्रति मिलियन टीडीएस सहन कर सकता है। पेयजल में टीडीएस की मात्रा 100-200 के बीच होनी चाहिए।
वर्जन-
स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. बिजेंद्र हुड्डा ने बताया कि वह नियमित रूप से शहर के पानी की जांच करते हैं। उनकी ओर से लोगों को शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के लिए जन स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा गया है। यह रिपोर्ट उपायुक्त को भी भेजी गई है।