पानीपत। उपभोक्ता आयोग ने सड़क हादसे में क्षतिग्रस्त हुई बीएमडब्ल्यू के मामले में फैसला सुनाते हुए नौ प्रतिशत वार्षिक दर के हिसाब से 14.47 लाख रुपये देने के आदेश दिए। पीड़ित को मानसिक प्रताड़ना देने पर बीमा कंपनी 15 हजार रुपये मुआवजा के रूप में देगी। मुकदमा खर्च में लगे 5500 रुपये भी बीमा कंपनी ही देगी।
सेक्टर-6 निवासी युवक की सड़क हादसे में क्षतिग्रस्त हुई बीएमडब्ल्यू इंश्योरेंस कंपनी ने क्लेम देने से इंकार कर दिया था। कंपनी ने पहले कहा था कि गाड़ी की मरम्मत नहीं हो सकती। इसलिए वह बदले में सेकेंड हैंड गाड़ी दे देंगे, लेकिन बाद में मना कर दिया। सेक्टर-6 निवासी देवेंद्र सिंह ने बताया कि उसने टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी से अपनी बीएमडब्ल्यू गाड़ी का 62,023 रुपये में 15.49 लाख रुपये का बीमा कराया था। यह बीमा 12 मई 2017 से लेकर 11 मई 2018 तक चालू था। 19 मार्च 2018 को घरौंडा निवासी चरण सिंह उसकी बीएमडब्ल्यू गाड़ी चला रहा था।
जब वह रात साढ़े आठ बजे सनौली पहुंचे तो उनके आगे ट्रक चल रहा था। ट्रक चालक ने पशु को बचाने के लिए ब्रेक लगा दिए। इस वजह उनकी गाड़ी ट्रक से जा टकराई और क्षतिग्रस्त हो गई। उन्होंने थाने में शिकायत दी और कंपनी को क्लेम देने की अपील की। कंपनी के अधिकारी ने सर्वे किया और कहा कि गाड़ी का नुकसान ज्यादा है, इसलिए इसकी मरम्मत नहीं की जा सकती। 10 दिसंबर 2018 को कंपनी ने ऑफर लेटर जारी किया, जिसमें कहा गया कि इसी मॉडल की सेकेंड हैंड गाड़ी उपलब्ध करा देंगे, लेकिन बाद में उन्होंने अपील याचिका को खारिज कर दिया। उसने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में याचिका दायर की। अब कंपनी को आयोग के चेयरमैन जेआर चौहान ने नौ प्रतिशत वार्षिक दर के हिसाब से 14.47 लाख रुपये देवेंद्र को देने के आदेश दिए है।