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Panipat News: रोडवेज डिपो में स्टेट टैक्स में बड़ा फर्जीवाडा, यूपी के आरटीए ने चार बसाें को किया जब्त

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पानीपत। रोडवेज डिपो पानीपत में स्टेट टैक्स चोरी का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। डिपो अधिकारियों ने बिना परमिट हरिद्वार और शामली चार बसों को भेज दिया। यूपी के आरटीए ने रोडवेज डिपो की चारों बसों को कैराना ने पकड़ लिया। यात्रियों को दूसरी बसों में रवाना कर चारों बसों को जब्त कर दिया। अधिकारियों की लापरवाही के चलते चार बसें पिछले चार दिन से बंद हैं। हैरत की बात यह है कि अगर सफर के दौरान कोई हादसा हो जाता तो सवारियों को क्लेम तक नहीं मिलता। डिपो अधिकारी फिलहाल इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं।
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मिली जानकारी के अनुसार पानीपत रोडवेज डिपो से हरिद्वार और शामली रूट पर चार बसों को रवाना किया था। इन बसों को शुक्रवार को आरटीए कैराना ने चैकिंग के दौरान पकड़ लिया। जांच में पाया कि इन बसों के स्टेट टैक्स का भुगतान नहीं किया और न ही इन बसों का यूपी के लिए परमिट लिया गया था। हरिद्वार रूट की बस से औसतन 25 हजार रुपये और कैराना रूट की बस रोजाना औसतन 15 हजार रुपये की कमाई होती है। जो इन बसों के बंद होने के कारण सरकारी राजस्व को भी नुकसान हो रहा है। रोडवेज अधिकारी अब इसे सामान्य कार्रवाई बताते हुए मामला दबाने का प्रयास कर रहे हैं।

2.50 लाख से अधिक रुपये होगा जुर्माना
पानीपत डिपो की रोडवेज बसों को बिना स्टेट टैक्स भुगतान के पकड़े जाने पर 60 से 70 हजार रुपये प्रति बस के हिसाब से आरटीए कैराना जुर्माना लगा सकता है। चारों बसों पर 2.50 से 2.80 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। अब सवाल यह है कि स्थानीय डिपो अधिकारी इस जुर्माने को कहां से पूरा करेंगे।
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दो हजार रुपये बचाने के लिए हुआ ये खेल
बताया जा रहा है कि पानीपत से उप्र और उत्तराखंड रूट पर चलने वाली सभी बसों के अन्य परमिट पूरे हैं। स्थानीय अधिकारी सिर्फ टैक्स में हेराफेरी का खेल करते हैं। पानीपत से उप्र जाने वाली बसों की बात करें तो निजी 50 सीटर बस पर 12 घंटे का एक हजार और 24 घंटे का दो हजार रुपये टैक्स बनता है। फिर रोडवेज अधिकारी सरकारी राजस्व में से भुगतान किए जाने वाले इस टैक्स में हेराफेरी क्यों करते हैं, यह एक अहम सवाल बना है।

टैक्स चोरी गलत, अब कार्रवाई करें अधिकारी
हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन संबंधित सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के डिपो सचिव सुल्तान मलिक ने कहा कि कर्मचारियों की मामूली गलती पर भी उन्हें निलंबित कर दिया जाता है। अब सरकारी राजस्व को लाखों की चपत लगाने वाले लापरवाह अधिकारी पर भी महाप्रबंधक और आला अधिकारियों को कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में लोगों की जान से ऐसा खिलवाड़ ना हो।
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ये सवाल जिनके चाहिए जवाब :
1. बिना परमिट भेजी बसों का क्या रिकॉर्ड दर्ज किया है और क्या इनका डीजल रिकॉर्ड में है?
2. रोडवेज अधिकारी अब इनका जुर्माना किस मद से भरेंगे और उच्चाधिकारियों को क्या जवाब देंगे?
3. इस दौरान कोई हादसा हो जाता तो यात्रियों को क्लेम कैसे देते और कौन जिम्मेदार होता?




वर्जन
चार बसों को कैराना में इंपाउंड किया गया है। ये सामान्य कार्रवाई है। जल्द ही जुर्माने का भुगतान कर बसें छुड़ा ली जाएंगी।
हरबीर मान, ट्रैफिक इंचार्ज, रोडवेज डिपो पानीपत।
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