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Panipat News: भूपेंद्र हुड्डा की चली बुल्लेशाह के नाम पर लगी मुहर

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अब पानीपत के विधानसभा चुनाव की असल राजनीतिक जंग शुरू होगी। कांग्रेस ने पानीपत शहरी विधानसभा सीट से अपने उम्मीदवार को उतार दिया है। कांग्रेस ने पुराने कांग्रेसी शाह परिवार के बुल्लेशाह को मैदान में उतारा है। उनको पूर्व विधायक रोहिता रेवड़ी पर तव्वजो दी गई है। हालांकि बुल्लेशाह को 2014 में रोहिता रेवड़ी ने मात दी थी। रोहिता रेवड़ी तीन माह पहले ही कांग्रेस में आई थीं।
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शाह परिवार का पानीपत में बड़ा रसूख है। बुल्लेशाह के पिता हुकूमत शाह पानीपत शहरी सीट से तीन बार व उनके बड़े भाई पांच बार यहां से विधायक रह चुके हैं। अब बुल्लेशाह की सीधी टक्कर भाजपा के प्रमोद विज से होगी। दोनों पहली बार आमने सामने होंगे। पानीपत शहरी विधानसभा पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा की चली है। यहां से कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया पूर्व विधायक रोहिता रेवड़ी की टिकट के लिए सिफारिश कर रहे थे। बुधवार देर रात कांग्रेस ने अपनी यह सूची जारी की। 2014 में हार के बाद बुल्लेशाह ने 2019 में भी भाजपा की लहर को देखते हुए चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था। कांग्रेस ने यहां से संजय अग्रवाल को चुनाव में उतारा था। इस बार भी संजय अग्रवाल अपने पुराने प्रदर्शन के आधार पर टिकट की मांग कर रहे थे। सैलजा गुट को बड़ा झटका : पानीपत शहरी सीट पर सैलजा संजय अग्रवाल के नाम की पैरवी कर रही थीं लेकिन उनको टिकट नही मिली।

उल्लेखनीय है कि पानीपत की शहरी विधानसभा सीट पर पहला विधानसभा चुनाव 1952 में हुआ था। इस चुनाव में कांग्रेस के कृष्ण गोपाल दत्त ने जनसंघ के कुंदन लाल को हराकर विधायक बने थे। तीन बार कांग्रेस ने यहां से जीत दर्ज की। 1967 के विधानसभा चुनाव में जन संघ पार्टी के फतेहचंद ने पानीपत सीट से अपनी जीत दर्ज की थी. 1968 में हुए विधानसभा चुनाव में फतेहचंद ने इस सीट को फिर से जीत लिया। वहीं 1972 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के हुकूमत शाह ने जन संघ के फतेह चंद को हराकर फिर से पानीपत शहरी सीट पर कब्जा कर लिया। 1977 में हुए विधानसभा चुनाव में फतेहचंद ने फिर से कांग्रेस पार्टी से इस सीट को जीत लिया। 1987 की बात करें तो हुकूमत शाह के बेटे बलबीर पाल शाह ने कांग्रेस पार्टी से अपनी जीत दर्ज की थी। 1987 से लेकर 1996 तक बलबीर पाल शाह पानीपत की शहरी सीट पर कायम रहे। इसके बाद 1996 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी ओमप्रकाश जैन ने बलवीर पाल को पटकनी दे दी। 2000 में हुए विधानसभा चुनाव में बलबीर पाल शाह फिर से चुनाव जीते और लगातार तीन चुनाव तक पानीपत सीट पर काबिज रहे। 2014 में यहां से भाजपा की रोहिता रेवड़ी जीती और 2019 में प्रमोद विज ने जीत दर्ज की थी।
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2019 में बुल्लेशाह ने चुनाव लड़ने से किया था इंकार-



2014 में हार के बाद बुल्लेशाह ने 2019 में भी भाजपा की लहर को देखते हुए चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था। कांग्रेस ने यहां से संजय अग्रवाल को चुनाव में उतारा था। इस बार भी संजय अग्रवाल अपने पुराने प्रदर्शन व कांग्रेस के प्रति अपनी इमानदारी की गवाही देते हुए टिकट की मांग कर रहे थे।



पानीपत शहरी सीट पर पहला चुनाव 1952 में हुआ-

पानीपत की शहरी विधानसभा सीट पर पहला विधानसभा चुनाव 1952 में हुआ था। इस चुनाव में कांग्रेस के कृष्ण गोपाल दत्त ने जन संघ के कुंदन लाल को हराकर विधायक बने थे. 3 बार कांग्रेस ने यहां से जीत दर्ज की। 1967 के विधानसभा चुनाव में जन संघ पार्टी के फतेहचंद ने पानीपत सीट से अपनी जीत दर्ज की थी. 1968 में हुए विधानसभा चुनाव में फतेहचंद ने इस सीट को फिर से जीत लिया। वहीं 1972 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के हुकूमत शाह ने जन संघ के फतेह चंद को हराकर फिर से पानीपत शहरी सीट पर कब्जा कर लिया। 1977 में हुए विधानसभा चुनाव में फतेहचंद ने फिर से कांग्रेस पार्टी से इस सीट को जीत लिया। 1987 की बात करें तो हुकूमत शाह के बेटे बलबीर पाल शाह ने कांग्रेस पार्टी से अपनी जीत दर्ज की थी। 1987 से लेकर 1996 तक बलबीर पाल शाह पानीपत की शहरी सीट पर कायम रहे। इसके बाद 1996 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी ओमप्रकाश जैन ने बलवीर पाल को पटकनी दे दी। 2000 में हुए विधानसभा चुनाव में बलबीर पाल शाह फिर से चुनाव जीते और लगातार तीन चुनाव तक पानीपत सीट पर काबिज रहे। 2014 में यहां से भाजपा की रोहिता रेवड़ी जीती और 2019 में प्रमोद विज ने जीत दर्ज की थी।
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सैलजा गुट को बड़ा झटका-

पानीपत शहरी सीट पर वह संजय अग्रवाल के नाम की पैरवी कर रही थी लेकिन उनको टिकट नही मिली।
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