समालखा विधानसभा के पूर्व विधायक भरत सिंह छौक्कर छठी बार पार्टी बदलकर कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। उन्होंने बुधवार को दिल्ली में कांग्रेस का दामन थामा है। वे पूर्व मंत्री रणदीप सिंह सुरजेवाला के नेतृत्व में कांग्रेस में शामिल हुए हैं। यह उनकी सातवीं पार्टी है। राजनीतिक गलियारों में उनको बड़ा आयाराम गयाराम बताया जाने लगा है। उनके कांग्रेस में शामिल होते ही समालखा विधानसभा में 2024 का रण अभी से सजने लगा है। यहां जजपा से पहले ही देवेंद्र कादियान मैदान में कूद चुके हैं। कांग्रेस के मौजूदा विधायक धर्म सिंह छौक्कर और भाजपा में कृष्ण छौक्कर, शशिकांत और संजय छौक्कर भी टिकट लेने के प्रयास में हैं।
पूर्व विधायक भरत सिंह छौक्कर ने दो दिन पहले विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की थी और अब रणदीपक सिंह सुरजेवाला के नेतृत्व में कांग्रेस का दामन थामकर सबको चौका दिया है। यह उस समय किया है जब समालखा में कांग्रेस से धर्म सिंह छौक्कर विधायक हैं। धर्म सिंह छौक्कर गुरुग्राम में रियल एस्टेट के मामले में मनी लॉडि्रंग मामले में आरोपी हैं। हालांकि धर्म सिंह छौक्कर हाईकोर्ट की शरण में गए हुए हैं। इन सबके बीच भरत सिंह छौक्कर का कांग्रेस में आना कई तरह की चर्चाओं को तेज कर रहा है। भरत सिंह छौक्कर ने कहा कि हलके की जनता उनके साथ हैं और वह जनता के समर्थन पर काम करता है। पार्टी में रहना या बदलना कोई बड़ी बात नहीं, उनका हलके में रहना बड़ी बात है। हम बता दें कि भरत सिंह छौक्कर को समालखा बार एसोसिएशन के प्रधान की सर्वसम्मति मिली थी।
कंपनी जीएम से विधायक तक
पूर्व विधायक भरत सिंह छौक्कर गुरुग्राम स्थित एक कंपनी का महाप्रबंधक थे और वे अब समालखा बार एसोसिएशन के प्रधान हैं। उन्होंने वर्ष 1996 में बसपा से राजनीति की शुरुआत की। इसके बाद कांग्रेस का झंडा उठा लिया। भूपेंद्र हुड्डा की बदौलत 2005 में टिकट मिला और चुनाव भी जीत गए। अगला चुनाव आते-आते उनके नंबर कट गए। कांग्रेस ने 2009 में संजय छौक्कर को टिकट दिया। उन्होंने नाराज होकर कांग्रेस छोड़ दी। हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां) के टिकट पर चुनाव लड़ रहे धर्म सिंह छौक्कर का समर्थन दिया। इस चुनाव में धर्म सिंह छौक्कर जीत भी हुई। भरत सिंह हजकां के अध्यक्ष कुलदीप बिश्नोई से भी मिले। वे इसके बाद हजकां को छोड़ गए। उन्होंने फिर इनेलो का दामन थामा। वे एक साल भी नहीं रुके और पार्टी छोड़ गए। उन्होंने पूर्व सांसद राजकुमार सैनी का समर्थन अपना दिया। राजकुमार सैनी ने भाजपा छोड़कर अपनी पार्टी बना ली। उन्होंने पिछले चुनाव में भाजपा का दाम थामा। उनको पिछले विस चुनाव में टिकट की उम्मीद थी, लेकिन शशीकांत कौशिक को टिकट दे दिया गया। उन्होंने किसान आंदोलन का नाम लेकर भाजपा छोड़ दी।
आप के चेयरमैन का चुनाव बीच में छोड़ा
भरत सिंह ने आम आदमी पार्टी का दामन थामा। आप ने उनको समालखा नगरपालिका चेयरमैन का टिकट दिया। उन्होंने चुनाव चिह्न लेकर प्रचार प्रसार किया, लेकिन चुनाव से दो-तीन दिन पहले ही रण छोड़ गए थे। जनता ने उन पर भरोसा रखा और वोट भी दी।
तहसीलदार समेत दस पर करा रखा है केस
पूर्व विधायक भरत सिंह छौक्कर ने पिछले दिनों एक प्रॉपर्टी के विवाद में भी सामने आए। पूर्व विधायक ने समालखा की तत्कालीन तहसीलदार सुमन लता समेत 10 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी मुकदमा दर्ज कराया था। उनका आरोप है कि कुछ लोगों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उसके साथ प्रॉपर्टी में फर्जीवाड़ा किया था