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भागवत कथा ही गीता का साक्षात स्वरूप : स्वामी ज्ञानानंद

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पानीपत। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि भागवत कथा साक्षात गीता का ही स्वरूप है। कृपा तो प्रभु दीन दुखी पर करते हैं। जब तक आप प्रभु के सम्मुख होकर दीनता प्रकट नहीं करेंगे, तब तक आप दीनदयाल के कृपा के पात्र नहीं हो सकते हैं। प्रभु का नाम दीनदयाल इसलिए ही रखा गया है, क्योंकि वह दीन के ऊपर दयाल हो जाते हैं।
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उन्होंने ये प्रवचन बुधवार को श्री अवध धाम सेवा समिति के तत्वावधान में श्री अवध धाम मंदिर के वार्षिक महोत्सव एवं श्री हनुमान जन्मोत्सव पर सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सत्संग समारोह में बुधवार को समापन पर दिए। समापन समारोह संतों के आशीर्वाद व विशाल भंडारे के साथ किया गया। व्यास मंच पर विराजमान प्रसिद्ध कथावाचक पंडित राधे-राधे महाराज ने कहा कि किसी से कुछ मांगने की बजाय प्रभु भक्ति में लीन रहें। प्रभु खुद सबकुछ देंगे। व्यक्ति को किसी से मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी। गीता में व्यक्ति को कर्म करने का संदेश दिया है। उसको इस संदेश को अपने मूल मंत्र में शामिल कर लेना चाहिए। दाऊजी महाराज ने गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज का अभिनंदन किया।
राधे-राधे महाराज ने कहा कि वर्षों की परंपरा का निर्वहन श्री अवध धाम सेवा समिति हनुमान जन्मोत्सव मना रही है। हनुमान जन्मोत्सव अवध धाम की सबसे प्राचीन परंपरा है और अवध धाम मंदिर से ही हनुमान जन्मोत्सव का प्रारंभ वर्षों पहले दाऊजी की अध्यक्षता में किया गया था।
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कथा के उपरांत एक भंडारा किया गया, जिसमें हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। इसके बाद मंगल आरती की गई और अवध धाम सेवा समिति ने सभी आए हुए भक्तों का स्वागत किया। अवध धाम सेवा समिति ने सभी श्रद्धालुओं से कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए जो प्रयास हुए उसका धन्यवाद किया। सभी सुहागिन महिलाओं ने जिन्होंने शोभा यात्रा के अंदर मंगल कलश उठाए थे, उनको श्रीफल का प्रसाद 13 अप्रैल को दिया जाएगा। यह घोषणा व्यास मंत्र से की गई।
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