पानीपत। दिन में चली हवा के कारण धूल के कण छट गए हैं। अब हवा में पीएम-2.5 की मात्रा धीरे-धीरे कम हो रही है। शुक्रवार को पीएम-2.5 की मात्रा पांच अंक तक कम हुई है, लेकिन पीएम-10 यानी हवा में अब धुएं की मात्रा लगातार बढ़ रही है। पीएम-10 की मात्रा दो अंक बढ़कर 158 पहुंच गई है। हवा में अब धुएं की मात्रा अधिक होने से छाती के रोगियों को अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पीएम-10 बढ़ने का मुख्य कारण फैक्टरियों से निकलने वाला धुआं, शहर से गुजरने वाले एक लाख वाहन व कूड़े में आग लगाना है। हवा में अमोनिया की मात्रा अब भी स्थिर बनी हुई है। सल्फर डाईऑक्साइड की मात्रा 10 अंक से बढ़कर 13 अंक पर पहुंच गई है। शुक्रवार को एक्यूआई 229 दर्ज किया गया है। यह ऑरेंज जोन में है। ये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
प्रशासन की ओर से अब भी ग्रैप-4 के नियमों के तहत सख्ती से काम नहीं हो रहा है। उद्योगों, रेस्टोरेंट व होटलों में चोरी छिपे डीजल संचालित जेनरेटर सेट चलाए जा रहे हैं। नगर निगम पेड़ पौधाें व शहर में सड़कों पर पानी का छिड़काव नहीं कर रहा है। पीडब्ल्यूडी व एनएचएआई ने स्टेट हाईवे व नेशनल हाईवे पर पानी का छिड़काव नहीं किया है, इसलिए शहर की हवा जहरीली हो चुकी है। सुबह शाम स्मॉग दमा, छाती व ह्दय रोगियों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रही है। डॉक्टर लोगों से सुबह शाम सैर न करने की अपील भी कर रहे हैं।
शहर की हवा का हाल-
हवा में अब तक 2.5 की मात्रा न्यनूतम 166, औसत 229 और अधिकतम 244 दर्ज की गई है। पीएम-10 की मात्रा न्यूनतम 150, औसत 154 और अधिकतम 158 दर्ज की गई है। नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा न्यूनतम 29, औसत 30 व अधिकतम 32 दर्ज की गई है। अमोनिया की मात्रा न्यनूतम दो व औसत व अधिकतम तीन दर्ज की गई है। हवा में कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा न्यनूतम 24, औसत 25 व अधिकतम 26 दर्ज की गई। सल्फर डाईऑक्साइड की मात्रा न्यनूतम 12 व अधिकतम 13 दर्ज की गई है। जहरीली हुई आबोहवा से दमा, चमड़ी व ह्दय के रोगी बढ़ रहे हैं। सुबह शाम आंखों में जलन महसूस हो रही है। दमा रोगियों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है।
हवा चलने से एक्यूआई हो रहा कम
पर्यावरण मामलों के विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि हवा चल रही है इसलिए एक्यूआई कम हो रहा है। हवा में सल्फर व अमोनिया की मात्रा भी कम है। पहले के मुकाबले एक्यूआई कंट्रोल में है, इसलिए प्रदूषण के कारकों का निरीक्षण होना जरूरी है। आने वाले दिनों में भी एक्यूआई के कम होने की गुंजाइश कम ही है।