पानीपत। महिलाओं और बच्चों के पोषण के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को धरातल पर लागू करने वाली नर्सिंग ऑफिसर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और आशा कार्यकर्ता अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रही हैं। एनएचएम के तहत कार्यरत नर्सिंग ऑफिसर की अपनी मांग है। इसके साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सरकारी कर्मचारियों का दर्जा चाहती हैं तो आशा कार्यकर्ता नियमित कराने की मांग कर रही हैं।
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नहीं मिलता नर्सिग आफिसर के बराबर वेतन
नर्सिंग ऑफिसर नीतू ने बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रखने में नर्सिंग ऑफिसर पर पूरी जिम्मेदारी होती है। वे यह काम जिम्मेदारी के साथ करती हैं। इन सबके बाद उनको अधिकार नहीं हैं। एनएचएम के तहत कार्यरत नर्सिंग ऑफिसर की नौकरी सुरक्षित नहीं है। उनको वेतन भी सामान्य नर्सिंग ऑफिसर के बराबर नहीं है, जबकि उनका काम बराबर का होता है। कई बार तो उनसे अधिक ड्यूटी ली जाती है।
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संघर्ष के बाद भी मांग नहीं हुई पूरी
आगनबाड़ी कार्यकर्ता शीला देवी निवासी बलाना ने बताया कि वे सरकार की हर योजनाओं को लेकर धरातल पर काम करती हैं। उनको आज तक सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया है। वे इसको लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रही हैं। सरकार से आश्वासन मिलने के बाद भी किसी प्रकार का कदम नहीं उठाया गया है। सरकार को उनकी मांगों को लागू करना चाहिए।
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आंगनबाड़ी को जेबीटी शिक्षक का मिले दर्जा
आगनबाड़ी कार्यकर्ता बबिता वासी कुराना ने बताया कि वे बच्चों को प्राथमिक ज्ञान देती हैं। इसके साथ बच्चों का पालन पोषण भी करती हैं। एक बच्चा आंगनबाड़ी के बाद ही प्राथमिक कक्षाओं में जाता है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एक अध्यापक की तरह काम करती हैं। उनको कार्यकर्ता की बजाय जेबीटी शिक्षक का दर्जा और वेतन दिया जाए।
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2005 से नियमित करने की उठा रही मांग
आशा कार्यकर्ता सीमा रानी ने बताया कि सरकारी की बच्चों व महिलाओं के पोषण और स्वास्थ्य संबंधित हर योजना को धरातल तक लेकर जाती हैं। आशा कार्यकर्ता पर हर योजना पर जिम्मेदारी के साथ काम करती हैं। इन सबके बाद भी उनका धरातल कमजोर है। वे 2005 से नियमित करने की मांग उठा रही हैं। सरकार ने आज तक उनकी मांगों को नहीं माना है।
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नहीं दिया जाता सम्मानजनक मानदेय
आशा कार्यकर्ता अनीता रानी ने बताया कि विभाग का ऑनलाइन व ऑफलाइन काम ईमानदारी के साथ करती हैं। वे हर योजना का डाटा रखती हैं और सरकार के मांगने पर दिया जाता है। सरकार की बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसी योजना को मूर्त रूप देने में उनका विशेष साथ रहता है। बावजूद इसके उनको सम्मानजनक मानदेय नहीं दिया जाता।
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आशा कार्यकर्ता सोनिया देवी ने बताया कि वे सरकार की योजनाओं को लागू करने के लिए लगातार काम करती हैं। उनके काम के चलते धरातल पर योजना पहुंच पा रही हैं। वे इन योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू भी कर रही हैं। इसके बाद भी उनकी समस्याओं और मांगों को लागू नहीं किया जा रहा है। वे लंबे से इसको लेकर संघर्ष कर रही हैं।