पानीपत। एनीमिया मुक्त अभियान सोमवार को संपन्न हो गया। सात दिन चले अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने को सिविल अस्पताल, समालखा अस्पताल, सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, 16 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और आंगनबाड़ी केंद्रों में लगभग 13 हजार महिलाओं, बच्चों, किशोरों की जांच की गई। इसमें लगभग एक हजार में खून की कमी मिली। इनको सिविल अस्पताल में डॉक्टरों से परामर्श लेने के साथ साथ आयरन की गोलियां भी दी गई है।
इनका सिविल अस्पताल में नियमित रूप से इलाज चलेगा। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने स्कूल की छुटि्टयां के कारण आंगनवाड़ी व स्वास्थ्य केंद्रों के स्तर पर एनीमिया मुक्त अभियान चलाया था। स्वास्थ्य विभाग साल में तीन बार अभियान चलाकर बच्चों, किशोरों व महिलाओं में एनिमिया की जांच करता है। ताकि इन्हें एनीमिया से बचाया जा सके। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 60 प्रतिशत गर्भवतियों में खून की कमी है।
गर्भवतियों में खून की कमी, इसलिए बढ़ी प्री मैच्योर डिलीवरी
डॉक्टरों के अनुसार जिले में 60 प्रतिशत गर्भवतियों में खून की कमी है। महिलाएं अपने खानपान पर ध्यान नहीं देती। जागरूकता के अभाव में महिलाएं एनीमिया ग्रस्त होती हैं। महिलाओं में खून की कमी से ही प्री मैच्योर डिलीवरी बढ़ रही है। सिविल अस्पताल में हर रोज औसतन दो-तीन व माह में औसतन 70-80 प्री मैच्योर डिलीवरी हो रही है। ऐसे में जच्चा बच्चा की जान को भी खतरा बना रहता है।
वर्जन :
पूरे जिले में सात दिन तक एनीमिया मुक्त अभियान चलाया गया है। जहां भी एनीमिया के रोगी मिले उन्हें आयरन की गोलियां देकर स्वास्थ्य केंद्रों में जांच के लिए भेजा गया। साल में तीन बार एनीमिया मुक्त अभियान चलता है। इस दौरान प्रयास किया गया कि अधिक से अधिक लोगों की जांच की जाए।
डॉ. शशि गर्ग, डिप्टी सिविल सर्जन, पानीपत।