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Panipat News: पुणे में बनाएंगे अमर मराठा ज्योति स्थल, पानीपत के दीप से होगा रोशन

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पानीपत। मशाल लेकर पानीपत काला आंब से पैदल महाराष्ट्र रवाना होते हुए । - फोटो : Panipat
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नीरज गिरी
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पानीपत। पानीपत में मराठों के शौर्य को महाराष्ट्र में भी याद रखने के लिए अब अमर जवान ज्योति की तरह अमर मराठा ज्योति स्थल बनाया जाएगा। इससे पहले महाराष्ट्र के पुणे से पहुंचे समूह ने काला आम्ब युद्ध स्मारक पर ज्योति जलाकर बलिदानियों को याद किया और उसी ज्योति को हाथ में लेकर पदयात्रा करते हुए पुणे के लिए रवाना हो गए।
सेनापति सुधीर इंगावले ने बताया कि पानीपत का युद्ध मराठियों के लिए अहम था, जिसमें महाराष्ट्र के हर घर से किसी न किसी जवान ने अपना बलिदान दिया था। इसे याद रखने के लिए पुणे में अमर जवान ज्योति की तरह तीसरे युद्ध को याद रखने के लिए अमर ज्योति स्थल बनाया जाएगा, जिसकी ज्योति हमेशा जलती रहेगी। पानीपत का तीसरा युद्ध भारत के इतिहास में सबसे बड़ा युद्ध था, जिसमें एक दिन में एक लाख से ज्यादा लोगों की मृत्यु हुई थी। उनके शौर्य को याद करने के लिए ही हर साल पुणे से सशक्त भारत समूह पानीपत आते हैं।
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1600 किलोमीटर पदयात्रा कर 28 फरवरी को पहुंचेंगे पुणे
14 दिन तक पदयात्रा करने के बाद सशक्त भारत समूह महाराष्ट्र के पुणे पहुंचेंगे। ज्योत लेकर मराठी दोपहर तीन बजे पानीपत से रवाना हो गए और 28 जनवरी को पदयात्रा करते हुए पुणे पहुंचेंगे। जाते हुए समूह सोनीपत के रास्ते से होकर गुजरेंगे।
- जिस रास्ते से 1761 में सदाशिव की सेना आई थी उसी रास्ते से आए
जिस रास्ते से 1761 में सदाशिव राव भाऊ की सेना पानीपत आई थी। उसी रास्ते से सशक्त भारत समूह सदाशिव राव की सेना के नाम धारण करके बाइक पर आई, जिसमें 75 पुणे के लोग शामिल थे। छह जनवरी को सेनापति का रूप धारण करके सुुधीर इंगवाले, मनोज वाघेरे, औकर अमृतकर, समाधास टिपरे, सुधीर पवार, वर्षा माने, काजल खेंगरे समेत 75 मराठी पानीपत पहुंचे।
बलिदानियों के शौर्य को किया याद
हर साल की तरह इस वर्ष भी सशक्त भारत समूह पानीपत पहुंचा है, जहां काला आम्ब स्मारक में पहुंचकर ज्योत प्रज्ज्वलित कर बलिदानियों के शौर्य को याद किया जाता है। हम उस समय सेना का स्वरूप धारण और नाम धारण करके पुणे से तीसरे युद्ध के दौरान इस्तेमाल हुए रास्ते से आते हैं ताकि वह रास्ते आगे चलकर हमारी पीढ़ी याद रख सकें।
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- समूह के सेनापति सुधीर इंगावले
-पानीपत से जाने के बाद यहां की गाई जाती है गाथा
पानीपत से पुणे जाने के बाद वहां पर लोग हमसे मिलने के लिए उत्सुक रहते हैं। वहां जाने के बाद युद्ध की गाथा और पानीपत के बारे में महाराष्ट्र निवासियों को दोबारा बताया जाता है, ताकि मराठा पीढ़ी दर पीढ़ी याद रख सकें।
- समूह के योद्धा राहुल माने
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