पानीपत। सरकार ने स्कूल संचालकों को अपने वाहनों को फिट करने के लिए दस दिन का समय दिया है। इसके बाद 26 अप्रैल से अनफिट वाहनों पर आरटीए की जबरदस्त कार्रवाई होगी। आरटीए ने सभी कमर्शियल वाहन चालकों को निर्धारित 20 नियमों का पत्र थमाते हुए उनके नियम पूरे करने की बात कही है। अगर कोई भी वाहन चालक अपने वाहन को इन नियमों पर खरा नहीं उतार पाता तो उसके खिलाफ कार्रवाई होना तय है। इनमें सबसे जरूरी बस की फिटेनस, स्पीड और संचालन प्रक्रिया को माना गया है।
अधिकारियों का कहना है कि सबसे पहले वाहन और वाहन चालकों को सही मानकों पर खरा उतरना होगा। इसके लिए बस या वैन का फिट होना अनिवार्य है। इनमें स्पीड गर्वनर के साथ जीपीएस भी होना चाहिए। स्पीड गर्वनर एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जो बसों की स्पीड को नियंत्रित करता है। शहर के किसी भी एरिया में इन वाहनों की स्पीड 50 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक नहीं होनी चाहिए। जबकि जीपीएस वाहन की लोकेशन के बारे में बताता है।
इसके अलावा ड्राइविंग के समय वाहन चालक नशा करके वाहन न चलाता मिले और वर्दी में होना चाहिए। वाहन चालक के पास पांच साल का अनुभव और हैवी लाइसेंस होना अनिवार्य होना चाहिए। उसे यातायात के सभी नियम पता होने चाहिए और इन नियमों का पालन करने वाला भी होना चाहिए। ड्रावर का मेडिकल फिटनेस होना भी अनिवार्य है। जो सिविल सर्जन से होना चाहिए और तीन साल में एक बार करवाना आवश्यक है। कोई भी स्कूल बस स्कूली बच्चों को स्कूल के अंदर पार्किंग में ही छोड़ेगी। अगर स्कूल से बाहर बच्चों को उतारा तो कार्रवाई होगी।
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ये हैं नियम, जिनका रखना होगा विशेष ध्यान-
आरटीए अधिकारियों ने कहा कि बस का फर्श टूटने या बस कंडम होने पर, आरटीए एक्ट 1988 के तहत कोई भी नियम पूरा न होने पर, आरसी, प्रदूषण प्रमाण पत्र, इंश्योरेंस, पासिंग, टैक्स और लाइसेंस न होने पर भी वाहन को जब्त किया जा सकता है। इसके अलावा बस पर निर्धारित नीला या पीला रंग न होने पर, बस के चारों ओर रिफ्लेक्टिव टेप न होने पर, बस में स्पीड गर्वनर न होने पर, बस पर स्कूल का नाम न लिखने होने के साथ बस पर ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा होना अनिवार्य है। सभी दस्तावेज पूर्ण न होने पर, ड्राइवर को पांच साल का अनुभव और हैवी लाइसेंस न होने पर, तीन बार से ज्यादा चालान होने पर, शहर में 50 किलोमीटर से ज्यादा स्पीड होने पर भी कार्रवाई होगी। सभी शैक्षणिक संस्थानों की बसों में फर्स्ट एड बॉक्स और अग्निशमन यंत्र भी जरूरी है। बस के अंदर मालिक के साथ पुलिस कंट्रोल रूम का नंबर भी अंकित होना चाहिए। बस में ड्राइवर के अलावा एक सहायक भी होना चाहिए। ड्राइवर का सिविल सर्जन से मेडिकल फिटनेस होना चाहिए। किसी भी स्कूल वाहन में उसकी बैठने की क्षमता से डेढ़ गुना अधिक सवारियां नहीं होनी चाहिए। किसी भी प्रकार से मोटर व्हीकल एक्ट 1988 की अवहेलना मिलने पर एनफोर्समेंट अधिकारी वाहन या चालक की आरसी, परमिट और लाइसेंस तक रद्द कर सकता है।
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सीएनजी वाली कैब और ऑटो पर नजर- आरटीए
अब आरटीए टीम नियमित चेकिंग के साथ सीएनजी लगी कैब और ड्राइवरों पर विशेष नजर रखेगी। सरकार की ओर से निर्धारित नियमों का सख्त से पालन किया जाएगा। अगर कोई वाहन या वाहन चालक नियमों का तोड़ेगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
शम्मी शर्मा, सह सचिव, आरटीए।