पानीपत। जीटी रोड स्थित आकाश इंस्टीट्यूट में छात्र अंशुल की हत्या के मामले में परिजनों ने इंस्टीट्यूट प्रबंधन के साथ पुलिस को भी कठघरे में खड़ा किया है। आरोप है कि जब अंशुल को उसके सहपाठी ने ही चाकू मारा तो इंस्टीट्यूट प्रबंधन ने प्राथमिक उपचार देने की बजाय जख्मी हालत में उसे धक्का मारकर बाहर निकाला और फिर शटर बंद कर सबूत मिटाने के प्रयास किए। उन्होंने शहर थाना पुलिस और प्रभारी पर भी इंस्टीट्यूट के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया। आक्रोशित परिजनों ने शनिवार को नागरिक अस्पताल में हंगामा किया और शव लेने से इंकार कर दिया। सूचना पर पहुंचे डीएसपी ने परिजनों को हरसंभव मदद और कार्रवाई का भरोसा देकर शांत कराया। इसके बाद परिजनों की ओर से
परिजनों के अनुसार, पुलिस ने महज नाबालिग छात्र पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया है, जबकि आकाश इंस्टीट्यूट प्रबंधन भी उसके बेटे की मौत के लिए बराबर का जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि समय रहते अंशुल को प्राथमिक उपचार दिया गया होता तो वह आज जिंदा होता। अंशुल के पिता ने कहा कि बेटे की हत्या के मामले में पुलिस से उनका विश्वास उठ चुका है। इस पर डीएसपी सतीश गौतम ने कहा कि मैं बेटा तो नहीं ला सकता, लेकिन इंसाफ जरूर दिलाऊंगा। उन्होंने परिजनों को भरोसा दिलाया कि आकाश इंस्टीट्यूट के खिलाफ जो भी शिकायत होगी, उस पर निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई नहीं कर पाने पर उन्होंने इस्तीफा देने की भी बात कही। इसके बाद अंशुल के परिजनों का गुस्सा शांत हुआ और उन्होंने आकाश इंस्टीट्यूट के खिलाफ पुलिस को लिखित में नई शिकायत दी। पिता राकेश वासी जौंधन कलां ने थाना शहर पुलिस को दी लिखित शिकायत में बताया कि वह सेना में जाट रेजीमेंट में हवलदार था। विगत वर्ष ही वह सेवानिवृत्त हुआ। उसके छोटे बेटे अंशुल ने अप्रैल 2023 में आकाश इंस्टीट्यूट में दाखिला लिया था। बेटा पढ़ाई में बहुत होशियार था। उसने 10वीं में 90 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। शुक्रवार को इंस्टीट्यूट में कक्षा के दौरान नाबालिग सहपाठी ने ही चाकू घोंपकर उसके बेटे की हत्या कर दी। उसने बताया कि इसमें आकाश इंस्टीट्यूट प्रबंधन का भी बराबर का हाथ हैं। इंस्टीट्यूट के स्टाफ ने घायल अंशुल को अस्पताल पहुंचाने की बजाय घायलावस्था में बाहर निकाल दिया। उसका बेटा बाहर तड़पता रहा और इंस्टीट्यूट स्टाफ सबूत मिटाने में लग गया। पिता ने डीएसपी से आकाश इंस्टीट्यूट के चेयरमैन, सिक्योरिटी गार्ड और पानीपत ब्रांच इंचार्ज के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की। इस दौरान अस्पताल में करीब साढ़े चार घंटे चले हंगामे के बाद पुलिस ने पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंपा। वहीं अस्पताल में विलाप करते हुए पिता बार-बार दोहराता रहा कि आकाश इंस्टीट्यूट ने उसके बेटे की जान ले ली। तीन लाख रुपये की फीस भरवाकर बेटे को कोई सुरक्षा नहीं दी, उसे उपचार तक नहीं दिलाया गया।
पिता राकेश ने बताया कि हत्या शाम साढ़े पांच बजे हुई थी, जबकि इंस्टीट्यूट ने उनके पास साढ़े छह बजे फोन किया। इसके बाद भी सही जानकारी नहीं दी गई। बताया गया कि इंस्टीट्यूट के बाहर आपके बेटे के साथ झगड़ा हो रहा है। इतना कहकर फोन काट दिया गया। उसने वापस फोन किया तो किसी ने नहीं उठाया। मौके पर पहुंचा तो पता चला कि इंस्टीट्यूट के अंदर कक्षा में उसके सहपाठी ने ही उसकी चाकू घोंपकर हत्या की है।
पुलिस ने शनिवार को नागरिक अस्पताल में अंशुल के शव का पोस्टमार्टम कराया। दो डाक्टरों के बोर्ड ने पोस्टमार्टम किया। प्राथमिक रिपोर्ट में सामने आया कि चाकू अंशुल के फेफड़े में लगा था और उसके आर-पार हो गया, जिस वजह से अंशुल सांस नहीं ले सका और कुछ देर में ही उसकी मौत हो गई।
जीटी रोड लालबत्ती स्थित राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल ने भी सोशल मीडिया ग्रुप में एक मैसेज डाला था, जिसमें बताया गया कि 11वीं कक्षा में काफी शरारती छात्र हैं। स्कूल ने यह मैसेज वीरवार को ही डाला था। इससे पहले ही स्कूल में अंशुल और उसके दोस्त तथा आरोपी छात्र के बीच झगड़ा हुआ था। नॉन मेडिकल के ग्रुप में स्कूल की तरफ से आठ छात्रों के नाम लिखे थे। इसमें स्पष्ट लिखा था कि ये बच्चे स्कूल का माहौल खराब कर रहे हैं। इनके अभिभावकों को शुक्रवार को स्कूल में बुलाया गया था।
घटना के बाद इंस्टीट्यूट प्रबंधन ने नहीं ली सुधआकाश इंस्टीट्यूट प्रबंधन और स्टाफ से कोई भी शनिवार को नागरिक अस्पताल में परिवार से मिलने नहीं पहुंचा और न ही अंतिम संस्कार में शामिल हुआ। इससे परिवार में काफी रोष है। परिजनों का आरोप है कि अंशुल की हत्या के बाद भी इंस्टीट्यूट में कक्षा चलती रही। अब इंस्टीट्यूट ने शनिवार और रविवार की छुट्टी की है। फिलहाल सोमवार को लेकर भी कोई संदेश नहीं आया है।
पुलिस ने हत्या की दर्ज एफआईआर में आकाश इंस्टीट्यूट की जगह आकार इंस्टीट्यूट लिख दिया। इस पर भी परिजनों ने हंगामा कर दिया। परिजनों ने पुलिस पर मिलीभगत का आरोप लगाया। परिजनों के अनुसार, घटना के बाद भी थाना प्रभारी एफआईआर में आकाश इंस्टीट्यूट का नाम न लिखने का दबाव बनाते रहे। साथ ही उसके पक्ष में सफाई पेश करते रहे।
पुलिस पूछताछ में नाबालिग हत्यारोपी ने बताया कि अंशुल ने वीरवार को स्कूल में उसको थप्पड़ मारा था। उसने उसी समय उससे बदला लेने का फैसला कर लिया था। वह स्कूल की छुट्टी के बाद किला बाजार गया और वहां से 20 रुपये में एक चाकू खरीदा। इसके बाद से वह मौके की तलाश में था। शुक्रवार को उसे कोचिंग सेंटर में कक्षा के अंदर मौका मिला तो उसने तुंरत हमला कर दिया।
पिता राकेश ने कहा कि सेना में जब आतंकी हमले में किसी फौजी को 10 गोली तक लग जाती है। तब भी समय से प्राथमिक उपचार के बाद उसे बचा लिया जाता है, लेकिन अंशुल को चाकू लगने के बाद भी उपचार नहीं दिलाया गया और उसने तड़पकर दम तोड़ दिया।
जाटल रोड शोंधापुर निवासी अंशुल का दोस्त हत्या के बाद गहरे सदमे में चला गया है। उसकी आंखों के सामने उसके दोस्त की हत्या की गई, उसे दुख है कि वह उसे बचा नहीं पाया। उसके पिता दीपक ने कहा कि उसे इस सदमे से बाहर निकलने और संतुलित माहौल देने के लिए मामा के घर भेजा गया है।
परिजनों की शिकायत पर नाबालिग हत्यारोपी पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। नाबालिग हत्यारोपी को जुवेनाइल कोर्ट में पेश कर बाल सुधार गृह भेज दिया है। पिता ने आकाश इंस्टीट्यूट के खिलाफ नई शिकायत दी है, जिस पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इंस्टीट्यूट में सीसीटीवी कैमरे की फुटेज और रिकॉर्ड को कब्जे में लिया जा रहा है। घटना की निष्पक्ष जांच कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
- सतीश गौतम, डीएसपी, पानीपत।