पानीपत। गांव मनाना में 28 मार्च को अधिकारी द्वारा नाबालिग की शादी रुकवाने के बावजूद परिजन दोबारा शादी करने जा रहे थे। अधिकारी ने इसी सूचना पर अब परिवार और किशोरी को कोर्ट में पेश किया, जहां कोर्ट ने शादी पर पूर्ण रूप से रोक लगा दी और बालिग होने से पहले शादी करने पर परिवार को बाल विवाह अधिनियम के तहत कार्रवाई करने की चेतावनी दी।
महिला संरक्षण एंव बाल विवाह निषेध अधिकारी रजनी गुप्ता ने बताया कि 28 मार्च को गांव मनाना में उन्होंने साढे 17 साल की नाबालिग की शादी रुकवाई थी। लड़की की बरात जींद के रामनगर से आनी थी। उस समय परिवार के बयानों के आधार पर ही शादी रुक गई थी, लेकिन अब उन्हें सूचना मिल रही थी कि परिवार दोबारा नाबालिग की शादी कर सकते है। जिनके बाद उन्होंने नाबालिग और उसकी विधवा मां को समालखा की ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अशोक की अदालत में पेश किया, जहां से शादी पर पूर्ण रूप से रोक लगवाई गई। विधवा मां का कहना है कि उसकी चार बेटियां है, जिनमें यह सबसे बड़ी है। उससे छोटी 16,13 और सात वर्ष की बेटी है। शादी करने का कारण गरीबी है। अधिकारी ने बताया कि जींद के जिस युवक से उसका रिश्ता हुआ है,वह बारहवीं पास है, जबकि नाबालिग आठवीं तक पढ़ी है।