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लिस ने सुरक्षा के लिए नहीं, रिश्वतखोरी के लिए लगाए नाके:
तीन रात 15 घंटे 8 पुलिस नाकों का रियलिटी टेस्ट:
ट्रैक्टर ट्राली, ट्रक व डंफर चालकों से रात भर पुलिस करती है अवैध वसूली, नाकों से वाहनों को गुजराने के लेती है 30, 50 व 100 रुपये प्रति वाहन
-किसी वाहन की नाकों पर नहीं होती चैकिंग
अमन वर्मा/भूपेंद्र आट्टा/मयंक तिवारी/संदीप भौरिया/रविंद्र नैन
पानीपत। अमर उजाला की टीम ने तीन रात, 15 घंटे तक शहर के चारों ओर बने 8 नाकों का रियलिटी टेस्ट किया। इस जांच में पुलिस के नाके शहर की सुरक्षा के लिए नहीं ब्लकि रिश्वतखोरी के नाके मिले। हर नाके पर पुलिस के कर्मचारी वाहन चालकों से पैसे लेते दिखाई दिए। हर नाके का एक रेट निर्धारित किया गया है। शहर के मुख्य आठ नाकों से गुजरने के लिए ट्रैक्टर चालकों, डंफर व ट्रक को 400-500 रुपये पुलिस को देने पड़ते हैं। पुलिस वाहनों की जांच नहीं करती। ब्लकि वाहनों के पास सीधा आकर पैसे मांगती है। खतरे का आभास करने के लिए उस क्षेत्र के एसएचओ की जिप्सी भी थोड़ी दूर पर खड़ी होती है ताकि नाकों पर वूसली के लिए खड़े पुलिस वालों को आगाह किया जा सके। पुलिस ने इस वसूली के लिए दिहाड़ी पर लड़कों को भी भर्ती कर रखा है, जोकि वाहन चालकों से वसूली करते हैं। पुलिस कर्मचारी वाहन चालकों से ये कहते हुए सुनाई देते हैं कि उन्हें भी ऑफिसरों को पैसे देने होते हैं। अमर उजाला टीम ने खुद वाहनों पर सवार होकर पुलिस कर्मचारियों की इस रिश्वतखोरी को अपने कैमरों में कैद किया है।
मंगलवार की रात हरियाणा यूपी बार्डर नाके की लाइव रिपोर्ट:
अमर उजाला की टीम मंगलवार रात को 11 बजे सनौली नाके पर पहुंची। यहां से एक रात को पुुराली से लदे 1 हजार ट्रैक्टर ट्राली यूपी में जाते हैं। लगभग 600 डंफर यूपी से पानीपत की ओर आते हैं। 5 हजार से अधिक ट्रक पानीपत और यूपी की तरफ जाते हैं। सुरक्षा के हिसाब से ये नाका सबसे संवेदनशील है। ये हरियाणा व यूपी का बार्डर है। इस नाके पर रात को दो पुलिस कर्मचारी तैनात थे। इनके पास दो निजी लड़के भी थे। जिनको इन्होंने दिहाड़ी पर भर्ती किया है। इस नाके पर पुलिस ट्रैक्टर चालकों से 100-100 रुपये, डंफर चालकों से रेत तस्करी के लिए 200-200 रुपये व ओवरलोड ट्रक व घोड़ा बग्गी वालों से 70-70 रुपये लेते हैं। अवैध वसूली के इस खेल को सनौली थाना प्रभारी की गाड़ी सुरक्षा देती है। इस नाकेे से 100 मीटर दूर ढाबे के पास एसएचओ की गाड़ी खड़ी होती है। वसूली करने वाले कर्मचारियों को आगाह करने के लिए पुलिस वाले लाइटें जलाकर उनको इंडीकेशन देते हैं। इस नाके पर पुलिस वाले हर रोज 1 लाख 30 हजार रुपये तक वसूल कर लेते हैं। पुलिस कर्मचारियों ने इस नाके पर स्ट्रीट लाइटें भी बंद करवा रखी है, ताकि उनको कोई पैसे लेते हुए देख ना सके। इस मोटे खेल में पुलिस के बड़े ऑफिसर भी शामिल है। ये रियलिटी टेस्ट करने के बाद जब अमर उजाला टीम लौट रही थी तो पुलिस कर्मचारियों ने अपनी गाड़ी में टीम का पीछा भी किया।
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एसपी सुमित ने आते ही नाके को किया था भंग:
एसपी सुमित कुमार ने पानीपत आते ही सबसे पहले सनौली नाके को भंग किया था। यहां से कर्मचारियों का तबादला भी इधर उधर किया था। 20 दिन तक ये नाका भंग रहा। इसके बाद दोबारा एसपी ने नाके पर कर्मचारी तैनात कर नाका लगवा दिया था।
बलजीत नगर नाका:
मंगलवार रात 2 बजे अमर उजाला की टीम बलजीत नगर नाके पर पहुंची। ये नाका यूपी से पानीपत की ओर आने वाले वाहनों की चैकिंग के लिए बनाया गया आखिरी नाका है। इसके बाद वाहन सीधे पानीपत में एंट्री कर जाते हैं। ये नाका शहर की सुरक्षा के मद्देनजर सबसे महत्वपुर्ण नाका है। ये नाका रात को बंद हो जाता है। पुलिस कर्मचारी रात को चौकी में जाकर दुबक जाते हैं। किसी भी वाहन की शहर में आते वक्त चैकिंग नहीं होती। रात को चौकी का गेट बंद हो जाता है।
चौटाला रोड नाका:
- 30 रुपये दिए तो नाराज हो गया रिश्वतखोर पुलिसकर्मी, बोला: तेरे इन रुपयो के लिए रात भर खड़ा रहता हूं क्या, 40 रुपये दे, तब जाने दूंगा।
सिवाह चौक स्थित चौटाला रोड पर नाका लगाकर दो पुलिसकर्मी वहां से गुजरने वाले ट्राली चालको सहित अन्य वाहन चालको से नाका पार करने की एवज में रिश्वत लेते है। साथ ही इन दोनों पुलिसकर्मियों को कोई अंजान व्यक्ति कैमरे में ना कैद कर रहा हो, इसके लिए वहां एक पुलिस की जिप्सी भी धूमती है। जिसमें सवार दो पुलिसकर्मी हर संदिग्ध व्यक्ति पर नजर जामए होती है। सोमवार रात 10 बजकर 26 मिनट पर अमर उजाला की टीम पराली से लदे ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्राली पर सवार हुई। कुछ दूरी पर चलने के बाद ही चौटाला रोड पर खड़े दो पुलिसकर्मियों में से एक पुलिसकर्मी ने टॉर्च दिखाकर ट्रैक्टर को रूकने का ईशारा किया। जिसके बाद ट्रैक्टर चालक रूका। उसके रूकते ही पुलिसकर्मी ने उसकी ओर हाथ बढ़ाया, जिस पर ट्रैक्टर चालक ने उसके हाथ में 10-10 के तीन नोट थमा दिए। जिस पर उस पुलिसकर्मी ने पूछा कि ये कितने है, तो जबाब में 30 रुपये सुनने के बाद उसने रुपये वापस दे दिए व कहने लगा कि तेरे इन 30 रुपयों के लिए ही मैं यहां रात को नाके पर खड़ा हूं। मैं नहीं लेता इन रुपयों को। इसके बाद वो नाराज हो गया, तो ट्रैक्टर चालक ने 10 का एक और नोट जेब से निकाला व उन 30 रुपयों में मिला कर पुलिसकर्मी को थमा दिए। जिसके बाद वो 40 रुपये लेकर वहां से चला गया व दूसरे ट्रैक्टर चालक से रुपये लेने लगा। वहीं ट्रैक्टर चालक ने बताया कि ये पुलिसकर्मी रोजाना ही इस तरह से अवैध वसूली करते है। अगर कोई इसका विरोध करता है, तो ये उसका ओवरलोड का चालान काट देते है। साथ ही बताया कि एक बार वो इनका वीडियो बनाने की कोशिश कर रहे थे, तो पुलिसकर्मी को भनक लग गई, जिसके बाद उन्होंने डंडो से खूब पीटा।
बरसत रोड चुंगी पर जिप्सी लगाकर डंपर चालकों से करते है हजारों में वसूली:
शहर में खनन घोटाला पुलिस की सह पर किया जा रहा है। गांव चंदौली व बरसत से ही ज्यादातर खनन घोटाला के केस सामने आते है। गौरतलब है कि ये दोनों जगह ही पुलिस की कमाई का बहुत अच्छा साधन बना हुआ है। यहां रात को 11 बजे के बाद सदर थाना की पुलिस जिप्सी में ही नाका लगाकर बैठ जाती है। गांव चंदौली व गांव बरसत से आने वाले हर डंपर चालक को इन पुलिसकर्मियों को रिश्वत देनी होती है। क्योंकि इन डंपर चालकों का घोटाला बहुत ज्यादा होता है, तो इन्हें रिश्वत भी बहुत ज्यादा देनी पड़ती है। इन डंपर चालकों से हजारों में पुलिसकर्मियों को रिश्वत लेते है।
सोदापुर रामस्वरूप चौक पर 24 घंटे लेते है रिश्वत, 24 घंटे में लाखों रुपये हो जाते है इकट्ठे:
असंध रोड स्थित गांव सोदापुर रामस्वरूप चौक पर पुलिसकर्मी दिन-रात यानि 24 घंटे रिश्वत लेती है। इस चौक पर कपड़ो से लदे बड़े-बड़े ट्राले को पार करवाने की एवज में पुलिस रिश्वत लेती है। इसी का एक वीडियो 15 दिन पहले वायरल हुआ था। जिसमें ट्राली चालक से 100 रुपये की रिश्वत लेता हुआ पुलिसकर्मी साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। गौरतलब है कि यहां से दिन भर में 100 के करीब कपड़ों से लदे हुए ट्रैक्टर-ट्रॉली निकलती है। हर किसी से पुलिस 100 रुपये की रिश्वत लेती है। यानि दिनभर में लाखों रुपयों को जमा कर पुलिस अपने घर जाती है।
पानीपत टोल प्लाजा पर अंधेरा होते ही पहले पीते है शराब, फिर लेते है रिश्वत:
पानीपत टोल प्लाजा, जिले के कई थानों की पुलिस का शराब पीने व अवैध वसूली करने का अड्डा बना हुआ है। अंधेरा होते ही जिले की पुलिस यहां अलग-अलग जिप्सियों सहित तवेरा गाड़ियों में सवार होकर आती है। यहां आने के बाद पुलिस पहले शराब के ठेके से शराब लेती है, फिर उसे पुलिस की गाड़ी में ही बैठकर पीते है। नशे की धुत हालत में पुलिसकर्मी लोगों पर पुलिस होने की धौंस जमाते हुए दिखाई देते है। इसी तरह का एक वीडियो रविवार की रात को वायरल हुआ था। जिसमें एक ओर अपनी जिप्सी छोड़कर सियाज गाड़ी में बैठकर पुलिसकर्मी शराब पी रह े थे। साथ ही दूसरी ओर दो गश्त पुलिसकर्मी गाड़ी हो छोड़कर शराब के ठेके पर शराब खरीदती हुई नजर आई थी। इसके अलावा एक पुलिस वैन में वर्दी में दो पुलिसकर्मी वैन के डैशबोर्ड पर जाम रखकर पीते हुए दिखाई दिए।
पानीपत की सीमा में घुसते ही हो जाती है अवैध वसूली शुरू :
पुलिस नाकों की आड़ में अवैध वसूली का गौरख धंधा पानीपत की सीमा में प्रवेश करते ही शुरू हो जाता है। अमर उजाला टीम द्वारा किए गए स्टिंग ऑप्रेशन के दौरान जो अवैध वसूली का जो कारनामा सामने आया है वो चौका देने वाला है। जींद की सीमा से पानीपत में पहला गांव करसिंधु लगता है, फिर नारा गांव आता है, जहां पर पुलिस नाका लगा हुआ है। वहीं से अवैध वसूली का धंधा शुरू हो जाता है। अमर उजाला टीम ने रात साढ़े 12 इसी बात का खुलासा करने के लिए ट्रैक्टर वालों से बातचीत की और उनके साथ ट्रैक्टर पर बैठ गए। जब नारा नाकबे पर पहुंचे तो एक व्यक्ति ने टोर्च जलाई और इशारा कर ट्रैक्टर रोकने को कहा। जब उससे पूछा गया कि तू पैसे क्यों ले रहा है तो उसने जवाब दिया कि और कौन लेगा। पुलिस द्वारा खड़े किए गए प्राइवेट व्यक्ति ने ये भी कहा कि अब नारा गांव में पुलिस कहीं पैसे नहीं लेगी। यह सब कुछ नारा चौंकी के सामने ही चल रहा था, जिससे साफ पता चलता है कि पुलिस द्वारा सीधे तौर पर रिश्वत ना लेकर प्राइवेट व्यक्ति के माध्यम से अवैध वसूली करवाई जाती है।
नारा नाके पर पैसे देने के बाद जब आगे चले तो मतलौडा पौने एक बजे चौंक पर एक पुलिस गाड़ी खड़ी मिलती है, वह भी टोर्च से इशारा करके रुकवाता है और ट्रॉली की आड़ में खड़ा होकर पैसे लेकर चला जाता है। जब पुलिस वाले से सवाल किया जाता है कि पीछे पैसे भी पैसे लिए थे, तो पुलिस वाला कहता है कि फिर यहां नहीं देगा। हाम न्यूए खड़े हैं के ड्यूटी पै।
पैसे लेने खेल यहीं खत्म नहीं हुुआ। उससे एक ही किलोमीटर आगे भालसी व फिर 15 किलोमीटर आगे असंध चौंकी पर ट्रैक्टर की आवाज सुनते ही पुलिस कर्मचारी बहार आता है और उनसे ट्रैक्टर वालों से वसूली करता है।
पैसे ना देने पर करवा देते हैं एक दिन खराब :
स्टींग के दौरान जब ट्रैक्टर चालकों से सवाल किया कि वो पैसे क्यों देते हैं तो ट्रैक्टर वालों ने कहा कि पैसे नहीं देंगे तो पूरी रात खड़े रात एक ही जगह खड़ा कर दिया जाता है व सुबह 7 बजे बोल देते हैं कि अब जाओ। जिसके बाद शहर में हैवी वाहनों की ऐंट्री पर बैन लग जाता है और उनका एक दिन खराब हो जाता है। जिस कारण उन्हें पैसे देने पड़ते हैं।
असंध नाके पर ट्रैक्टर की आवाज सुनते ही चौंकी से बाहर आता है पुलिस कर्मी :
नारा, मतलौडा व भालसी के बाद असंध नाके पर भी ट्रैक्टर वालों से वसूली की जाती है। उमर उजाला टीम जब करीब 2 बजे असंध नाके पर पहंची तो वहां से सैंकड़ो वाहन गुजरे और कोई भी पुलिस कर्मी नाके पर नहीं आया। जब ट्रैक्टर की आवाज सुनाई दी तो एक पुलिस कर्मी पैसे वसूलने के लिए बाहर आकर खड़ा हो गया और प्रति ट्रॉली 50 रुपये वसुले।
भालसी में परिवहन मंत्री के पेट्रोल पंप पर पीसीआर में बैठे हुए को ही दिये जाते हैं पैसे :
नारा नाके पर पुलिस का प्राइवेट व्यक्ति व मतलौडा चौंक पर पुलिस कर्मचारी आकर पैसे लेता है, तो भालसी में परिवहन मंत्री के पेट्रोल पंप पर स्थिति बिल्कूल उल्ट है। भालसी पेट्रोल पंप पर पीसीआर की बत्ती जलाकर इशारा कर दिया जाता है कि आगे पुलिस खड़ी है। उसके बाद ट्रैक्टर चालक को खुद पीसीआर में बैठे पुलिस कर्मचारी को पैसे देकर आने पड़ते हैं।
अमर उजाला टीम जब बुधवार रात एक बजे ट्रैक्टर पर बैठकर भालसी परिवहन मंत्री के पेट्रोल पंप पर पहुंची पीसीआर नंबर 9 ने बत्ती जलाकर रूकने का इशारा कर दिया। उस समय तुड़ी से भरे दो ट्रैक्टर ट्रोली एक साथ थे। ट्रैक्टर चालक जब पीसीआर में बैठे पुलिस कर्मी को 50 रुपये देने लगा तो, पुलिस वाला नखरे दिखाने लगा और उन्हें भी वापस लौटाने लगा। पुलिस वाला दोनों ट्रैक्टर ट्रोलियों के 50-50 रुपये मांगता रहा। जब पुलिस वाला नहीं माना
तो चालक को 100 रुपये ही देने पड़े। परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार के पेट्रोल पंप पर पैसे लेने का यह खेल पूरी रात चलता है।
हर जगह मनमानी वसूली करती है पुलिस :
पुलिस द्वारा हर नाके पर अलग अलग रेट तय है। नारा नाके पर 50 रूपये, मतलौडा चौंक पर पचास रुपये, भालसी पेट्रोल पंप पर पचास रुपये, असंध नाके पर पचास रुपये। यानी 18 किलोमीटर के अंदर पुलिस द्वारा प्रति ट्रैक्टर 200 रुपये वसूले जाते हैं। उसके बाद चौटाला रोड पर रेट थोड़ सस्ते हैं, चौटाला रोड पर 40 रुपये वसूले जाते हैं। उसके बाद सनौली नाके पर 100 रुपये प्रति वाहन फिक्स है। बरसत रोड पर 200 रुपये वसूले जाते हैं।
पूरे जिले में कहीं नहीं करती पुलिस गश्त, एक ठिकाने पर खड़े होकर करती है अवैध वसूली :
अमर उजाला टीम ने तीन रात पानीपत की सभी सड़कों पर सफर किया, जिससे पता चला कि पानीपत पुलिस रात भर कहीं पर भी गश्त नहीं करती। गश्त करने की बजाए पीसीआर रोड साइड खड़ी कर पुलिस अवैध वसूली का गौरख धंधा चलाती है। वाहनों की चेकिंग के नाम पर लगाए गए नाकों पर केवल अवैध वसूूली ही चलती है। किसी भी वाहन को रुकवाकर नहीं देखा जाता। कंटेनर वाले ट्रक भी सीधे गुजरते रहते हैं। पुलिस की इस लापरवाही से पुरे शहर में क्राइम बढ़ता जा रहा है। जो पूरे जिले के लिए खतरनाक है।
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जिनके खिलाफ सबूत मिलेंगे उन पर कड़ी कार्रवाई होगी: विर्क
पुलिस कर्मचारियों द्वारा नाकों पर वाहन चालकों से वसूली करने की शिकायत व सबूत मिलते ही आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। किसी भी सूरत में किसी को बख्सा नहीं जाएगा।
नवदीप सिंह विर्क, एडीजीपी हरियाणा पुलिस
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