फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तीन कॉलोनियों के मकानों की तो दूर सरकारी इमारतों तक की नहीं हो सकी रजिस्ट्री

विज्ञापन
विज्ञापन
तीन कॉलोनियों के मकानों की तो दूर सरकारी इमारतों तक की नहीं हो सकी रजिस्ट्री
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। वार्ड 10 की तीन कॉलोनियों में लगभग 1700 परिवार कस्टोडियम से मिल्कियत कराने के लिए द तरों, नेताओं व कोर्ट के चक्कर काट रहे है। यहीं हाल राजीव कॉलोनी, चावला कॉलोनी व सैनी कॉलोनी की सरकारी इमारतों का है। सभी सरकारी इमारतें आज तक बिना रजिस्ट्री के ही है। थाना किला, रेस्ट हाउस, पीडब्ल्यूडी विभाग की जमींने, कम्युनिटी हाल सहित सभी जमींने बगैर रजिस्ट्री के ही है। लोगों का कहना है कि किला भी आज तक बगैर रजिस्ट्री ही पड़ा है। कॉलोनिवासियों का कहना है कि वो 30-35 साल से अपने मकान बनाकर इस जगह पर रह रहे हैं। उन्होंने 1990-1991 में अपनी मकानों की कस्टोडियम से मलकियत कराने के लिए अपनी फाइलें जमा कराई थी। इसके बाद 2001 में नोटिस मिलने पर मलकियत के लिए फाइल भरी गई। उसके बाद से कई बार फाइल जमा करा चुके हैं पर हर बार निराशा ही हाथ लग रही है। कॉलोनी वासी राजेंद्र का कहना है कि सरकार की मनसा हमारे मकानों की रजिस्ट्री कराने की नहीं लग रही। क्योंकि अब तक सरकारी इमारतों तक की भी रजिस्ट्री प्रशासन नहीं करवा सका है। उनका कहना है कि वो कानून का पालन कर रहे है, लेकिन प्रशासन अपनी मनमानी दिखा रहा है। हर सरकार के सामने वो अपनी मांग रख चुके है। हर बार उनको आश्वासन ही मिलता है। वहीं कुलवंत सिंह का कहना है कि हमारी रजिस्ट्री में तो रेट राह का रोड़ा बने हुए है। लेकिन सरकारी इमारतों की रजिस्ट्री तो सरकार के हाथ की बात है। इससे साफ जाहिर होता है कि प्रशासन खुद ही कानून को फॉलो नहीं कर रहा है। बता दें कि वार्ड 10 की तीन कॉलोनियों के 1700 परिवारों की मांग है कि उनके मकानों की रजिस्ट्री 2001 के रेट के हिसाब से होनी चाहिए। जबकि प्रशासन की जिद्द है कि रजिस्ट्री के लिए नए रेट लिये जाएंगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें