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खरना के साथ रखा 36 घंटे का निर्जला व्रत, आज अस्तांचल सूर्य को अर्घ्य

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पानीपत। छठ पूजा में दूसरे दिन को श्रद्धालुओं ने खरने में खीर-पूड़ी का प्रसाद ग्रहण किया। इसके साथ ही 36 घंटे का उपवास भी शुरू हो गया। रविवार को डूबते और फिर सोमवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ चार दिवसीय महापर्व संपन्न होगा।
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खरना में शनिवार को दिनभर व्रत रखकर श्रद्धालुओं ने शाम को खीर पूड़ी का भोग लगाया। फिर प्रसाद ग्रहण करने के बाद आसपास और मित्रों-रिश्तेदारों में वितरित किया। इससे पहले नहाय खाय के साथ चार दिनी पर्व शुरू हुआ था। श्रद्धालुओं ने विधि विधान से अलग चूल्हा स्थापित कर प्रसाद बनाया। अधिकतर श्रद्धालुओं ने इसके लिए लकड़ी के नए चूल्हे का इस्तेमाल किया। कारण कि यह शुभ और पवित्र माना जाता है। विदित हो कि छठ पर्व में शुद्धता का बहुत ध्यान रखा जाता है और लहसुन-प्याज का प्रयोग भी वर्जित रहता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित राधे-राधे ने बताया कि षष्ठी तिथि 30 अक्तूबर को प्रात: काल 5:49 बजे लग रही है जोकि 31 अक्तूबर को प्रात: काल 3:27 बजे तक रहेगी। 30 अक्तूबर को सूर्यास्त शाम को 5:37 बजे होगा और 31 अक्तूबर को सूर्योदय प्रात: 6:34 बजे होगा। अरुणोदय काल में दूसरे अर्घ्य के बाद व्रत का पारण होगा।
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सजाए गए घाट, श्रद्धालुओं का लगा तांता
- छठ महापर्व की तैयारी पूरी, खरीदारी करने बाजारों में उमड़े श्रद्धालु
पूर्वांचल मीडिया प्रमुख चंदन चौहान ने बताया कि पानीपत के सभी घाटों को बड़ी मेहनत और तसल्ली से सजाया गया है। रविवार की दोपहर से ही श्रद्धालुओं का तांता घाटों पर लग जाएगा। मुख्य रूप से असंध रोड रजबाहे में रामराज संस्था की ओर से इंतजाम किया गया है। एनएफएल रजबाहे पर पूर्वांचल समन्वय परिवार संस्था, पूर्वांचल कल्याण समिति और पूर्वांचल एकता मंच ने घाटों की तैयारी कर ली है। बाबरपुर ड्रेन नंबर दो पर जनहित प्रवासी वेलफेयर सोसायटी के माध्यम से साफ-सफाई और सारी विधि व्यवस्था को किया गया है। इसी तरह सैनिक कॉलोनी और कुटानी रोड पर सूर्यदेव छठ सेवा समिति के तरफ से विधि व्यवस्था किया गया है।
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