पानीपत। स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके अनुरूप जिला स्तर पर काम भी चल रहा है। एक जनवरी से 20 जून तक जिले में लगभग 1.50 लाख लोगों की टीबी जांच हुई है। लगभग 1350 नए टीबी के रोगी मिले हैं। 18 लोगों की इन दिनों में टीबी से मौत हुई है। जिले में अब टीबी के लगभग 3800 मरीजों का इलाज चल रहा है। पिछले छह साल में टीबी से जिले में 710 लोगों की मौत हो चुकी है। 2023 में भी 96 लोग टीबी से जिंदगी की हार गए थे। 22 मार्च को स्वास्थ्य विभागने जिले के 22 गांवों को टीबी मुक्त घोषित किया था। सोमवार को इन गांवों की पंचायतों के लिए स्काई लार्क रिसोर्ट में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इन गांवों के सरपंचों को सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने सम्मानित किया। सरपंचों के प्रयास से यह गांव टीबी मुक्त हुए हैं। कार्यक्रम में टीबी के नोडल अधिकारी डॉ. ललित वर्मा ने अपनी कार्यप्रणाली की रिपोर्ट पेश की।
इन गांवों के सरपंचों को किया गया सम्मानित-
जिले में फिलहाल टीबी के अतोलाुपर, बहरामपुर, मोहाली, नुरपुर मुगलान, संजौली, बिजावा, ब्राह्मण माजरा, चमराड़ा,कैत,खलीला माजरा,भालसी,डुमियाना, खंदरा, ऊंटला, भैंसवाल,बुढ़नपुर, छदिया, ढोढपुर, गढ़ी छाजु, रायमल, सिंबलगढ़ व गांव निजामपुर को टीबी मुक्त घोषित किया गया है।
जिले में इलाज की व्यवस्था-
- 01 जिला क्षय केंद्र
- 06 टीबी यूनिट (जांच व दवा)
- 12 माइक्रोस्कोपिक केंद्र (जांच केंद्र)
- 175 गांवों में ट्रीटमेंट सुपरवाइजर
वर्जन-
सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग गंभीरता से काम कर रहा है। पिछले तीन साल में जिले में लगभग पांच लाख लोगों की टीबी जांच हुई है। टीबी के रोगी तलाशने पर कर्मचारियों को भत्ता भी दिया जाता है। जागरूकता से टीबी को हराया जा सकता है। टीबी रोगियों से अपील है कि वो इलाज पूरा कराएं। मेडिकल स्टोर संचालकों से भी अपील की जाती है कि वो हर टीबी रोगी का डाटा उन्हें उपलब्ध कराएं। जिले में 21 गांवों को टीबी मुक्त घोषित किया गया है। इन गांवों के सरपंचों को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया है।