पानीपत। सेक्टर 29 पार्ट-2 में सात माह में तीसरी बार निगम की सीवर लाइन लीक होने से धंसी जमीन की निगम ने लीकेज को ढूंढ निकाला है। जमीन के 25 फुट नीचे छह फुट मोटी बिछाई पाइपलाइन में महज 25 मीटर की लंबाई में 20 छेद मिले हैं। इनमें से एक छेद तो चार फुट वर्गाकार के हैं। जिससे निकासी पानी प्रेशर के साथ बाहर आ रहा है। जमीन में इस पानी के लगातार जाने की वजह से जमीन बार बार धंस रही है। इससे आधे शहर की निकासी भी ठप होने का डर बना हुआ है। वहीं, लगातार जमीन धंसने से हादसों का भी अंदेशा बना हुआ है।
निगम अधिकारियों का कहना है कि अब इस पाइपलाइन पर स्टील की प्लेट लगाई जाएंगी। इस पर कंक्रीट डालकर इसे बंद कर दिया जाएगा। इसके बाद वापस मिट्टी से गड्ढे को ढक दिया जाएगा। इस प्रक्रिया में तीन से चार दिन का अतिरिक्त समय लग सकता है। इससे पहले अगस्त 2023, अक्टूबर 2023 और अब जनवरी में ये लाइन लीक होने से ये लाइन धंस चुकी है। इस पर वार्ड 1 से 16 तक की सीवर निकासी निर्भर करती है। अगर ये लाइन ध्वस्त होती है तो आधे शहर की निकासी ठप हो जाएगी।
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300 मीटर पर पौने पांच करोड़, 11 किलोमीटर पर 150 करोड़ खर्च संभावित
निगम अधिकारियों ने सेक्टर 29 पार्ट- 2 में सीईटीपी प्लांट के पास सबसे ज्यादा जर्जर करीब 300 मीटर के दायरे की पुरानी लाइन को बदलवाने के लिए सरकार को करीब पौने पांच करोड़ रुपये का एस्टीमेट बनाकर भेजा था। जिसे अब तक मंजूरी नहीं मिली है। वहीं, शहर से लेकर एसटीपी प्लांट तक बिछाई कुल करीब 11 किलोमीटर लंबी इस लाइन को बदलवाने पर करीब 150 करोड़ खर्च होने का अनुमान है।
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पुरानी लाइन, केमिकल का पानी बना रहा जर्जर
अधिकारियों का मानना है कि एक तो ये लाइन करीब पचास साल पुरानी है। इसमें कई मैनहोल के जरिए डाई हाउस संचालक केमिकल का पानी छोड़ रहे हैं। इससे पहले भी लाइन से कालीन तक मिल चुके हैं। पहले से पुरानी कंक्रीट की लाइन को केमिकल जर्जर बनाने का काम कर रहा है। इसके लिए लाइन के सभी मैनहोल की जांच पड़ताल की जाएगी। अगर किसी डाई हाउस या फैक्ट्री का केमिकल युक्त पानी इसमें मिला तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
वर्जन:
फिलहाल लाइन के आसपास की मिट्टी हटाकर लीकेज ढूंढी गई है। यहां करीब 20 छेद मिले हैं। इनको बंद करने के लिए प्रयास किया जा रहा है। इसमें तीन से चार दिन का समय लग सकता है।
अर्पित बुधवार, एसडीओ, नगर निगम