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स्वास्थ्य पर प्रदूषण का प्रभाव-

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पानीपत। हवा के दबाव के कारण धुआं व धूल स्मॉग का रूप ले रहे हैं। सुबह शाम पड़ने वाली स्मॉग स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल रही है। दमा रोगियों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। नेत्र और छाती के रोगी भी एकाएक बढ़ रहे हैं। सिविल अस्पताल में दमा और छाती रोगियों की ओपीडी 60 से अधिक हो रही है। यह ओपीडी पहले 25-30 थी। वायरल बुखार की ओपीडी भी 300 पार हो चुकी है। स्मॉग से एलर्जी के रोगी भी बढ़ रहे हैं। आंखों में जलन के साथ एलर्जी हो रही है। ऐसे में हर रोज 20-35 मरीज आ रहे हैं। निजी अस्पतालों में इस वक्त सभी प्रकार की ओपीडी 10 हजार से अधिक हो चुकी है। डॉक्टरों की लोगों को सलाह है कि सुबह व शाम सैर करने से बचें। मास्क का प्रयोग करें। रविवार को फैक्टरियां बंद होने व जाम कम होने के बाद भी एक्यूआई 195 दर्ज किया गया। ये भी स्वास्थ्य के लिए खराब माना जाता है। स्मॉग हार्ट, टीबी व किडनी के रोगियों के लिए बेहद खतरनाक है।
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स्मॉग का गर्भवतियों पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। यह गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी खतरनाक है। स्मॉग ज्यादा होने से प्री-मेच्योर डिलीवरी का खतरा बढ़ जाता है। डॉक्टरों ने गर्भवतियों को सलाह दी है कि वे अधिकतर समय घर पर ही बिताएं। जरूरी काम या डॉक्टरों से परामर्श के लिए ही घर से निकलें।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन दो बार एनएचएआई, पीडब्ल्यूडी और नगर निगम को शहर में सड़कों व पेड़ पौधों पर पानी का छिड़काव करने के निर्देश दे चुके हैं, लेकिन अब तक उनके निर्देशों पर गंभीरता से काम नहीं हुआ। इसलिए शहर की सड़कों पर धूल उड़ रही है और स्मॉग बन रहा है। यही स्मॉग दमा के रोगियों की संख्या बढ़ा रहा है।
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स्मॉग और मौसम बदलाव से 30 प्रतिशत मरीज बढ़े : डॉ. त्यागी
सिविल अस्पताल के कंसल्टेंट डॉ. जितेंद्र त्यागी ने बताया कि पहले ओपीडी 250 तक रहती थी। अब 300 पार हो चुकी है। 20 प्रतिशत दमा 30 प्रतिशत छाती के रोगी बढ़ गए हैं। टीबी और हार्ट के रोगियों के लिए परेशानी बढ़ रही है। वायरल फीवर की ओपीडी भी बढ़ गई है। लोगों को सलाह है कि वे अधिकतर समय घरों में बिताएं। सुबह शाम की सैर से परहेज करें।
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