नगर निगम में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन करने वाले करीब 14 हजार लोगों को निगम सात साल बाद भी लाभ नहीं दे पाया है। जिसके बाद निगम ने योजना के अंतर्गत आवेदन करने वालों का दोबारा सर्वे करवाने का फैसला लिया है। इसके लिए निगम की ओर से 50 कर्मचारी फील्ड में उतारे गए हैं। ये कर्मचारी सभी फाइलों के पते पर जाकर आवेदनकर्ताओं की फिजिकल वैरिफिकेशन करेंगे। अगर उनके आवेदनों में कोई त्रुटि है उसे पूरा करवाया जाएगा। या अधूरे दस्तावेज हैं तो वे भी लिए जाएंगे। इस सर्वे को 31 जुलाई तक पूरा किया जाएगा।
सर्वे पूरा होने के बाद सभी का रिकार्ड पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज करवाया जाएगा। इस सर्वे में योग्य मिलने वाले लोगों को सर्वे के आधार पर सरकार की नई पॉलिसी बनाएगी। जिसके बाद इनको योजनाबद्ध तरीके से लाभ दिया जा सकता है। इसे लेकर शुक्रवार को निगम आयुक्त यशेंद्र सिंह ने ताऊ देवी लाल काम्प्लेक्स में एक बैठक भी की। जिसमें योजना से संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
बता दें कि योजना के लाभ को सालों से तरस रहे इन लोगों को देख जनप्रतिनिधियों से लेकर सरकार भी सख्त हो चुकी है। इसका रिकार्ड सीएम फ्लाइंग से लेकर विजिलेंस तक खंगाल चुकी है लेकिन अधिकारी आज तक अपने बकाया काम को पूरा नहीं कर पाए। हैरानी की बात ये है कि 14 हजार आवेदनकर्ताओं में से चार हजार परिवार गुम हो गए।
योजना के अनुसार शुरू किए गए सर्वे मेें आवेदक की संपत्ति निगम के अप्रूव्ड एरिया में होनी चाहिए। उसके पास इसका मालिकाना हक का दस्तावेज भी होना चाहिए और उसका मकान कच्चा होना चाहिए। वहीं फ्लैट लेने वाली योजना में अभी फ्लैट उपलब्ध नहीं हैं। तो ऐसे में फ्लैट लेने वाले आवेदक मकान बनाने के लिए दी जानी वाली आर्थिक सहायता के लिए आवेदन कर सकते हैं।
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आवेदन में मिली थी त्रुटियां
निगम की पीएम आवास योजना शाखा के कर्मचारी अंकित ने बताया कि याशी एजेंसी की ओर से 2016-17 में सर्वे किया गया था। इस सर्वे में करीब 14 हजार परिवार योजना के अनुरूप पाए गए। इनसे आवेदन मंगवाए गए। इनके आवेदनों में काफी त्रुटियां मिली। जिस वजह से उन्हें योजना का लाभ नहीं दिया गया। इनमें किसी के पास संपत्ति की मलकियत का सबूत नहीं था तो किसी ने अपना पता तक बदल दिया। आवेदन करने वाले हजारों लोगों के फोन नंबर तक बंद हो गए। कई केस ऐसे भी सामने आए जिनके पक्के घर थे, वे योजना के अनुसार योग्य ही नहीं थे। इन सभी कारणों के चलते इनको लाभ नहीं दिया गया। अब इनका दोबारा सर्वे करवाया जा रहा है।
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दस हजार लोग फ्लैट लेने के थे इच्छुक, अन्य बनाना चाहते थे मकान
याशी के सर्वे में जिले भर से योजना का लाभ लेने के लिए कुल 14 हजार आवेदन आए। इनमें फ्लैट लेने के इच्छुक करीब दस हजार थे जबकि मकान बनाने के लिए आर्थिक सहायता लेने वाले करीब 1467 थे। फ्लैट वालों को फ्लैट नहीं मिले और मकान बनाने वालों की लिस्ट में से निगम अब तक केवल 249 को ही लाभ दे पाया है। इसी प्रकार समालखा में भी फ्लैट के लिए करीब हजार आवेदन आए और मकान बनाने के लिए 449 आवेदन आए। जिसमें से करीब 70 को ही लाभ दिया गया है।
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प्रधानमंत्री आवास योजना के आवेदनकर्ताओं, पेंडिंग केसों को लेकर अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त निर्देेश दिए गए हैं। जल्द से जल्द सर्वे पूरा करवा कर योजनाबद्ध तरीक से लोगों को योजना का लाभ दिलवाया जाएगा।
यशेंद्र सिंह, आयुक्त, नगर निगम।