पानीपत। व्यापारी व उद्यमियों से मिलने वाले कर से प्रदेश विकास की राह पर अग्रसर होता है। ये ही सरकार की मुख्य कमाई है। शहर के 10919 व्यापारियों ने छह साल से आबकारी एवं काराधान विभाग के 121 करोड़ रुपये नहीं दिए हैं। 2017 से पहले की ये रकम लंबित है।
विभाग ने इन व्यापारियों को कर जमा कराने के लिए नोटिस जारी किए तो लगभग 550 व्यापारी कोर्ट चले गए। लगभग 150 व्यापारी अपने व्यापार छोड़कर दूसरा काम करने लगे हैं। आबकारी एवं काराधान विभाग ने अब कर वसूलने के लिए व्यापारियों को 31 जनवरी तक ब्याज में भी छूट दी है। विभाग के लिए ये राशि अर्जित करना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। ये रकम 2017 से पहले की बकाया है। विभाग ने व्यापारियों को बेहतर सेवा देने के लिए एक मुश्त व्यवस्थापन योजना 2023 के तहत सेक्टर 25 स्थित अपने कार्यालय में हेल्प डेस्क भी लगाया है। यहां व्यापारियों को विभिन्न स्कीमों व योजनाओं के बारे में बताया जा रहा है।
आबकारी एवं काराधान विभाग ने मार्च 2022 से मार्च 2023 रिकॉर्ड 6820 करोड़ रुपये जीएसटी शहर से वसूली है। विभाग ने 2021 के मुकाबले 336 करोड़ रुपये अधिक जीएसटी वसूला था। 2021 में 6484 करोड़ रुपये जीएसटी वसूला गया था। विभाग ने पिछले डेढ़ साल में रिफाइनरी के तेल से 493 करोड़ रुपये जीएसटी वसूला है। प्राकृतिक गैस पर 151 करोड़ रुपये जीएसटी वसूला गया है।
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टैक्स देने वाला जिला पानीपत
पानीपत प्रदेश में सबसे अधिक टैक्स देने के मामले में पानीपत गुरुग्राम के बाद दूसरे नंबर पर है। पानीपत हर वर्ष 12 हजार करोड़ रुपये टैक्स के रूप में देता है। उद्यमियों के अनुसार पानीपत में लगभग 18 हजार उद्योग हैं। हर उत्पाद पर जीएसटी लिया जा रहा है। पानीपत से सरकार की अरबों रुपये की आय है लेकिन पानीपत को इसके बदले खास कुछ नहीं मिलता।
वर्जन-
आबकारी एवं काराधान विभाग के उप आयुक्त अभिषेक सांगवान ने बताया कि कर जमा कराने पर 31 जनवरी तक ब्याज में छूट भी दी गई है। जिनका कर बकाया है उनको नोटिस भी दिए जा रहे हैं। विभाग उद्यमियों व कारोबारियों के लिए तमाम स्कीम भी लेकर आया है।